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Sachin kumar
kaii phool hain baagh men hañs rahe par
kaii phool hain baagh men hañs rahe par | कई फूल हैं बाग़ में हँस रहे पर
- Sachin kumar
कई
फूल
हैं
बाग़
में
हँस
रहे
पर
नज़र
में
मेरी
तेरा
चर्बा
ग़ज़ब
का
- Sachin kumar
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न
कोई
बीन
बजाई
न
टोकरी
खोली
बस
एक
फोन
मिलाने
पे
साँप
बैठा
है
कोई
भी
लड़की
अकेली
नज़र
नहीं
आती
यहाँ
हर
एक
ख़जाने
पे
साँप
बैठा
है
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Muzdum Khan
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कुछ
नज़र
आता
नहीं
उस
के
तसव्वुर
के
सिवा
हसरत-ए-दीदार
ने
आँखों
को
अंधा
कर
दिया
Haidar Ali Aatish
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मुद्दत
के
बाद
उस
ने
जो
की
लुत्फ़
की
निगाह
जी
ख़ुश
तो
हो
गया
मगर
आँसू
निकल
पड़े
Kaifi Azmi
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नज़र
में
रखना
कहीं
कोई
ग़म
शनास
गाहक
मुझे
सुख़न
बेचना
है
ख़र्चा
निकालना
है
Umair Najmi
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हुस्न
को
भी
कहाँ
नसीब
'जिगर'
वो
जो
इक
शय
मिरी
निगाह
में
है
Jigar Moradabadi
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सफ़र
के
ब'अद
भी
मुझ
को
सफ़र
में
रहना
है
नज़र
से
गिरना
भी
गोया
ख़बर
में
रहना
है
Aadil Raza Mansoori
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बोसा
देते
नहीं
और
दिल
पे
है
हर
लहज़ा
निगाह
जी
में
कहते
हैं
कि
मुफ़्त
आए
तो
माल
अच्छा
है
Mirza Ghalib
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हुस्न
सब
को
ख़ुदा
नहीं
देता
हर
किसी
की
नज़र
नहीं
होती
Ibn E Insha
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हसरत
भरी
नज़र
से
तुझे
देखता
हूँ
मैं
जिसको
ये
खल
रहा
है
वो
आँखों
को
फोड़
ले
Shajar Abbas
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हुस्न
को
हुस्न
बनाने
में
मिरा
हाथ
भी
है
आप
मुझ
को
नज़र-अंदाज़
नहीं
कर
सकते
Rais Farog
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सदा
तुम
से
करता
रहूँगा
मोहब्बत
यक़ीं
तो
करो
मैं
हूँ
लड़का
ग़ज़ब
का
Sachin kumar
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तुझे
देख
कर
सोचता
हूँ
मैं
अक्सर
नज़ारा
ख़ुदा
ने
बनाया
ग़ज़ब
का
Sachin kumar
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निगाहों
से
ये
जो
इशारे
हुए
हैं
इशारों
ने
दीवाने
मारे
हुए
हैं
कई
हुस्न
वाले
मुझे
चाहते
थे
मगर
मेरी
जाँ
हम
तुम्हारे
हुए
हैं
तेरे
लौटने
की
ख़बर
थी
मिली
जब
सड़क
तब
से
हम
यूँँ
निहारे
हुए
हैं
हुई
तुम
हो
किशमिश
असर
है
नगर
का
इधर
हिज्र
में
हम
छुहारे
हुए
हैं
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Sachin kumar
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मेरे
भीतर
भी
दबी
है
लाश
कोई
शव
उठाने
वाले
नजरें
तेज़
तो
कर
Sachin kumar
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मयकदों
में
मैं
आऊँगा
लेकिन
शर्त
है
इंतिज़ाम
अच्छा
हो
Sachin kumar
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