hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Subodh Sharma "Subh"
har roz roz dil men naya gham li.e hue
har roz roz dil men naya gham li.e hue | हर रोज़ रोज़ दिल में नया ग़म लिए हुए
- Subodh Sharma "Subh"
हर
रोज़
रोज़
दिल
में
नया
ग़म
लिए
हुए
बैठे
हुए
हैं
रौशनी
मद्धम
किए
हुए
रोते
हुए
का
हाथ
बटाना
नहीं
कभी
कहना
उसे
कि
हम
भी
ये
आलम
जिए
हुए
साबित
किया
था
हमने
मोहब्बत
को
बे-वफ़ा
कपड़े
उतार
कर
के
थे
परचम
सिए
हुए
जितनी
चढ़ी
हैं
आज
मज़ारों
पे
चादरें
उतने
गुनाह
इश्क़
में
हैं
हम
किए
हुए
- Subodh Sharma "Subh"
Download Ghazal Image
या
तो
जो
ना-फ़हम
हैं
वो
बोलते
हैं
इन
दिनों
या
जिन्हें
ख़ामोश
रहने
की
सज़ा
मालूम
है
Shuja Khawar
Send
Download Image
22 Likes
सज़ा
सच
बोलने
की
यह
मिली
है
सभी
ने
कर
लिया
हम
से
किनारा
Meem Alif Shaz
Send
Download Image
1 Like
वो
मेरा
जब
न
हो
सका
तो
फिर
यही
सज़ा
रहे
किसी
को
प्यार
जब
करूँँ
वो
छुप
के
देखता
रहे
Mazhar Imam
Send
Download Image
46 Likes
तेरी
ख़ुशबू
को
क़ैद
में
रखना
इत्रदानों
के
बस
की
बात
नहीं
Fahmi Badayuni
Send
Download Image
78 Likes
शौक़,लत,आवारगी,अय्याशी
में
गुज़री
हमारी
ज़िन्दगी
अब
तू
मुनासिब
सी
सज़ा
दे
गिनती
करके
Kartik tripathi
Send
Download Image
7 Likes
भले
हैं
फ़ासले
क़ुर्बत
से
ख़ौफ़
लगता
है
ये
क्या
बला
है
जो
ऐसी
विरानी
क़ैद
हुई
Prashant Beybaar
Send
Download Image
24 Likes
हम
एक
रात
हुए
थे
क़रीब
और
क़रीब
फिर
उसके
बाद
का
क़िस्सा
गुनाह
जैसा
है
Aks samastipuri
Send
Download Image
41 Likes
मुझ
से
क्या
हो
सका
वफ़ा
के
सिवा
मुझ
को
मिलता
भी
क्या
सज़ा
के
सिवा
Hafeez Jalandhari
Send
Download Image
30 Likes
करे
जो
क़ैद
जुनूँ
को
वो
जाल
मत
देना
हो
जिस
में
होश
उसे
ऐसा
हाल
मत
देना
जो
मुझ
सेे
मिलने
का
तुमको
कभी
ख़याल
आए
तो
इस
ख़याल
को
तुम
कल
पे
टाल
मत
देना
Read Full
Kashif Adeeb Makanpuri
Send
Download Image
39 Likes
यूँँ
ज़िंदगी
गुज़ार
रहा
हूँ
तिरे
बग़ैर
जैसे
कोई
गुनाह
किए
जा
रहा
हूँ
मैं
Jigar Moradabadi
Send
Download Image
31 Likes
Read More
जीतने
का
शौक़
था
पर
मात
खानी
पड़
गई
इश्क़
शेर-ओ-शाइरी
में
जब
ज़बानी
पड़
गई
याद
से
हमने
तेरी
हर
इक
निशानी
दूर
की
इक
घड़ी
थी
हाथ
में
जिसकी
निशानी
पड़
गई
आज
जब
वो
लौटकर
आया
हमारी
मौत
पर
लग
रहा
कम
एक
दिन
की
ज़िंदगानी
पड़
गई
वो
मुझे
दुनिया
कहा
करता
उसे
फिर
एक
दिन
मुझको
आख़िर-कार
दुनिया
ही
दिखानी
पड़
गई
Read Full
Subodh Sharma "Subh"
Download Image
1 Like
हाथ
सर
पे
रख
रहे
गुस्ताख़
ख़ाली
जल
गया
जब
सब
बची
है
राख़
ख़ाली
इन
ठिकानों
पर
भला
अब
कौन
चहके
सब
परिंदे
उड़
गए
हैं
शाख़
ख़ाली
Read Full
Subodh Sharma "Subh"
Send
Download Image
4 Likes
चल
दिया
पलट
के
मैं
घर
ख़ुमार
बाक़ी
है
कुछ
सुधार
है
मुझ
में
कुछ
सुधार
बाक़ी
है
साथ
जो
मेरे
था,
मैं
क़र्ज़-दार
सबका
हूँ
शुक्र
है
ख़ुदा
मुझपे
इक
उधार
बाक़ी
है
Read Full
Subodh Sharma "Subh"
Send
Download Image
2 Likes
एक
मुद्दत
से
रही
पल
में
चली
जाएगी
ज़िंदगी
आज
या
ये
कल
में
चली
जाएगी
जो
भी
आया
है
यहाँ
उम्र
बिताने
आया
ये
धरा
भी
तो
रसातल
में
चली
जाएगी
चार
दिन
की
ही
बची
और
ख़ुशी
है
मेरी
फिर
तो
हँसने
की
रिहर्सल
में
चली
जाएगी
हम
हैं
वो
हंस
जो
बैठे
हैं
तेरी
राह
तके
तू
वो
मछली
है
जो
फिर
जल
में
चली
जाएगी
Read Full
Subodh Sharma "Subh"
Download Image
1 Like
उसके
आगे
कहें
मजाल
करें
बोल
सकते
हैं
जो
मलाल
करें
आप
शायर
हैं
कह
के
वो
मुझ
सेे
रोज़
कहता
है
इक
सवाल
करें
Read Full
Subodh Sharma "Subh"
Send
Download Image
0 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Safar Shayari
Democracy Shayari
Raasta Shayari
Qismat Shayari
Raaz Shayari