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Subodh Sharma "Subh"
dono ko mili hai ik ummeed mubarak ho
dono ko mili hai ik ummeed mubarak ho | दोनों को मिली है इक उम्मीद मुबारक हो
- Subodh Sharma "Subh"
दोनों
को
मिली
है
इक
उम्मीद
मुबारक
हो
तुम
सर्द
का
मौसम
हम
ख़ुर्शीद
मुबारक
हो
है
एक
ख़ुदा
जैसे
वैसे
ही
है
मेरा
दिल
मानिंद
उसी
के
मैं
तौहीद
मुबारक
हो
कुछ
देर
यहाँ
बैठो
वो
चाँद
झुलस
जाए
फिर
ख़ुद
ही
कहे
ख़ुद
से
ये
दीद
मुबारक
हो
जिसको
भी
मिलो
हँसके
ये
एक
हिदायत
दो
गुड़िया
ये
उसे
कहना
तुम
ईद
मुबारक
हो
- Subodh Sharma "Subh"
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सर्दी
है
कि
इस
जिस्म
से
फिर
भी
नहीं
जाती
सूरज
है
कि
मुद्दत
से
मिरे
सर
पर
खड़ा
है
Fakhr Zaman
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मैं
अपनी
दुनिया
का
ऐसा
सूरज
हूँ
जिस
सूरज
का
गहना
मुश्किल
होता
है
Aalok Shrivastav
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सूरज
लिहाफ़
ओढ़
के
सोया
तमाम
रात
सर्दी
से
इक
परिंदा
दरीचे
में
मर
गया
Athar nasik
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दिन
ढल
गया
और
रात
गुज़रने
की
आस
में
सूरज
नदी
में
डूब
गया,
हम
गिलास
में
Rahat Indori
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मिरे
सूरज
आ!
मिरे
जिस्म
पे
अपना
साया
कर
बड़ी
तेज़
हवा
है
सर्दी
आज
ग़ज़ब
की
है
Shahryar
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ये
लाल
शा
में
ये
लाल
अंबर
ये
लाल
सूरज
चमक
रहा
है
मुझे
बता
दो
कहाँ
है
खोई
तिरे
लबों
की
ये
सुर्ख़
लाली
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Anmol Mishra
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मुमकिन
है
कि
सदियों
भी
नज़र
आए
न
सूरज
इस
बार
अँधेरा
मिरे
अंदर
से
उठा
है
Aanis Moin
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सूरज
से
जंग
जीतने
निकले
थे
बेवक़ूफ़
सारे
सिपाही
मोम
के
थे
घुल
के
आ
गए
Rahat Indori
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ऐसी
सर्दी
है
कि
सूरज
भी
दुहाई
माँगे
जो
हो
परदेस
में
वो
किस
सेे
रज़ाई
माँगे
Rahat Indori
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अगर
साए
से
जल
जाने
का
इतना
ख़ौफ़
था
तो
फिर
सहर
होते
ही
सूरज
की
निगहबानी
में
आ
जाते
Azm Shakri
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मक़ाम-ए-दिल
में
दर्जा
दो
दफ़ा
हासिल
नहीं
होता
मेरी
उँगली
कमल
पर
है
मगर
ये
दिल
नहीं
होता
पढ़ाई
छोड़
कर
मैं
लौट
आया
गाँव
को
अपने
फ़क़त
डिग्री
से
अब
कुछ
भी
कहीं
हासिल
नहीं
होता
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Subodh Sharma "Subh"
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आता
है
काम
कब
ये
सिखाया
हुआ
सबक़
सब
सीख
के
भी
हाथ
पे
छाले
पड़े
रहे
Subodh Sharma "Subh"
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वो
हुस्न
था
शराब
जो
वाजिब
हुआ
नहीं
कहने
के
बावजूद
भी
मैंने
छुआ
नहीं
हासिल
नहीं
हुआ
वो
तो
हमने
भी
उम्र
ये
सज्दे
में
काट
दी
है
मगर
की
दु'आ
नहीं
लगने
लगें
जो
दाग़
परीज़ाद
तुम
पे
तो
कहना
हमारे
बीच
में
कुछ
भी
हुआ
नहीं
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Subodh Sharma "Subh"
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किसी
दिन
मूड
घूमा
तो
ये
चक्का
जाम
कर
देंगे
मेरा
चर्चा
तेरे
अख़बार
में,
पैग़ाम
कर
देंगे
हमारे
ख़ून
में
मेहनत
की
ये
मिक़दार
इतनी
है
ये
दस्तावेज़
डिग्री
सब
ही
तेरे
नाम
कर
देंगे
तुझे
चुन
के
बता
फिर
से
भला
अब
क्या
करेंगे
हम
हमारे
काम
तो
पूरे
सभी,
श्री
राम
कर
देंगे
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Subodh Sharma "Subh"
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तू
बता
कैसे
मैं
ख़ुद
को
इस
तरह
से
बाँट
लूँ
एक
चुनना
है
मुझे
फिर
क्यूँ
दहाई
छाँट
लूँ
वो
गले
लगकर
मुझे
रोता
है
'शुभ'
हर
बार
तो
पहले
ग़ुस्सा
कर
चुका
हूँ
अब
ज़रा
सा
डाँट
लूँ
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