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Subodh Sharma "Subh"
maqaam-e-dil men darja do dafa haasil nahin hota
maqaam-e-dil men darja do dafa haasil nahin hota | मक़ाम-ए-दिल में दर्जा दो दफ़ा हासिल नहीं होता
- Subodh Sharma "Subh"
मक़ाम-ए-दिल
में
दर्जा
दो
दफ़ा
हासिल
नहीं
होता
मेरी
उँगली
कमल
पर
है
मगर
ये
दिल
नहीं
होता
पढ़ाई
छोड़
कर
मैं
लौट
आया
गाँव
को
अपने
फ़क़त
डिग्री
से
अब
कुछ
भी
कहीं
हासिल
नहीं
होता
- Subodh Sharma "Subh"
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दिल
में
और
दुनिया
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
वक़्त
के
हमेशा
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
Jaun Elia
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उम्र
गुज़री
दवाएँ
करते
'मीर'
दर्द-ए-दिल
का
हुआ
न
चारा
हनूज़
Meer Taqi Meer
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तुम्हारे
ख़त
को
जलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
ये
दिल
बाहर
निकलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
तुम्हारा
फ़ैसला
है
पास
रुकना
या
नहीं
रुकना
मेरी
क़िस्मत
बदलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
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Tanoj Dadhich
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दिल
गया
रौनक़-ए-हयात
गई
ग़म
गया
सारी
काएनात
गई
Jigar Moradabadi
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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किस
तरह
'अमानत'
न
रहूँ
ग़म
से
मैं
दिल-गीर
आँखों
में
फिरा
करती
है
उस्ताद
की
सूरत
Amanat Lakhnavi
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न
तेरे
आने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
न
दिल
लगाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
क़सम
ख़ुदा
की
बताता
हूँ
राज़
ये
तुमको
नहारी
खाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
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Paplu Lucknawi
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ज़िंदगी
भर
के
लिए
दिल
पे
निशानी
पड़
जाए
बात
ऐसी
न
लिखो,
लिख
के
मिटानी
पड़
जाए
Aadil Rasheed
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ये
कहते
हो
तिरे
जाने
से
दिल
को
चैन
आएगा
तो
जाता
हूँ,
ख़ुदा
हाफ़िज़!
मगर
तुम
झूठ
कहते
हो
Zubair Ali Tabish
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तिरंगा
दिल
में
है
लबों
पे
हिंदुस्तान
रखता
हूँ
सिपाही
हूँ
हथेली
पे
मैं
अपनी
जान
रखता
हूँ
Shashank Shekhar Pathak
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हर
सम्त
है
ख़ुदा
वो
किसी
से
जुदा
नहीं
गालिब
नज़र
से
पी
है
नज़र
में
ख़ुदा
नहीं
Subodh Sharma "Subh"
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चल
दिया
पलट
के
मैं
घर
ख़ुमार
बाक़ी
है
कुछ
सुधार
है
मुझ
में
कुछ
सुधार
बाक़ी
है
साथ
जो
मेरे
था,
मैं
क़र्ज़-दार
सबका
हूँ
शुक्र
है
ख़ुदा
मुझपे
इक
उधार
बाक़ी
है
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Subodh Sharma "Subh"
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तू
बता
कैसे
मैं
ख़ुद
को
इस
तरह
से
बाँट
लूँ
एक
चुनना
है
मुझे
फिर
क्यूँ
दहाई
छाँट
लूँ
वो
गले
लगकर
मुझे
रोता
है
'शुभ'
हर
बार
तो
पहले
ग़ुस्सा
कर
चुका
हूँ
अब
ज़रा
सा
डाँट
लूँ
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Subodh Sharma "Subh"
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सभी
कुछ
हाथ
हो
के
दर-बदर
है
तेरे
ता'वीज़
का
ये
सब
असर
है
हसीं
सीरत
पे
ये
बेचैन
आँखें
चटकती
धूप
सहरा
में
शजर
है
बने
अर्जुन
यहाँ
कितने
हैं
बैठे
कहाँ
पर
ये
कहाँ
इनकी
नज़र
है
नहीं
रोना
किसी
दुख
पर
मुझे
'शुभ'
जो
होना
है
वही
होना
अगर
है
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Subodh Sharma "Subh"
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उसके
आगे
कहें
मजाल
करें
बोल
सकते
हैं
जो
मलाल
करें
आप
शायर
हैं
कह
के
वो
मुझ
सेे
रोज़
कहता
है
इक
सवाल
करें
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