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SIDDHARTH SHARMA
dil ke andar dukaan hota hai
dil ke andar dukaan hota hai | दिल के अंदर दुकान होता है
- SIDDHARTH SHARMA
दिल
के
अंदर
दुकान
होता
है
जिसका
बाहर
मकान
होता
है
दिल
के
इक
हिस्से
में
मोहब्बत
बस
बाक़ी
सब
में
जहान
होता
है
- SIDDHARTH SHARMA
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नहीं
ये
फ़िक्र
कोई
रहबर-ए-कामिल
नहीं
मिलता
कोई
दुनिया
में
मानूस-ए-मिज़ाज-ए-दिल
नहीं
मिलता
Asrar Ul Haq Majaz
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हम
तो
कुछ
देर
हँस
भी
लेते
हैं
दिल
हमेशा
उदास
रहता
है
Bashir Badr
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दोस्त
ने
दिल
को
तोड़
के
नक़्श-ए-वफ़ा
मिटा
दिया
समझे
थे
हम
जिसे
ख़लील
काबा
उसी
ने
ढा
दिया
Arzoo Lakhnavi
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निभेगी
किस
तरह
दिल
सोचता
है
अजब
लड़की
है
जब
देखो
ख़फ़ा
है
Fuzail Jafri
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उस
के
दिल
की
आग
ठंडी
पड़
गई
मुझ
को
शोहरत
मिल
गई
इल्ज़ाम
से
Siraj Faisal Khan
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दिल
आज
शाम
से
ही
उसे
ढूँडने
लगा
कल
जिस
के
बा'द
कमरे
में
तन्हाई
आई
थी
Ammar Iqbal
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तुम्हें
इक
मश्वरा
दूँ
सादगी
से
कह
दो
दिल
की
बात
बहुत
तैयारियाँ
करने
में
गाड़ी
छूट
जाती
है
Zubair Ali Tabish
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जितने
भी
हैं
ज़ख़्म
तुम्हारे
सिल
देगी
होटल
में
खाने
का
आधा
बिल
देगी
सीधे
मुँह
जो
बात
नहीं
करती
है
जो
तुमको
लगता
है
वो
लड़की
दिल
देगी
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Shadab Asghar
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हम
को
दिल
से
भी
निकाला
गया
फिर
शहरस
भी
हम
को
पत्थर
से
भी
मारा
गया
फिर
ज़हरस
भी
Azm Shakri
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आप
चाहें
तो
कहीं
और
भी
रह
सकते
हैं
दिल
हमारा
है
तो
मर्ज़ी
भी
हमारी
होगी
Shamsul Hasan ShamS
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जब
कभी
मैं
कहता
ख़ुद
को
फ़ुजू़ल
है
लड़की
डाँट
कर
माँ
कहती
सुन
एक
फूल
है
लड़की
चूम
कर
वो
आयत
बोली
लगाओ
रामायण
मैं
भी
जा
के
मंदिर
बोला
क़ुबूल
है
लड़की
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SIDDHARTH SHARMA
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मेरा
चेहरा
कभी
दिन
भर
बनाती
थी
कभी
वो
जाग
कर
दफ़्तर
बनाती
थी
सुनो
मैं
ऐसी
इक
लड़की
से
वाक़िफ़
था
धड़कते
दिल
को
जो
पत्थर
बनाती
थी
कलेजा
ले
गया
मैं
उसके
हाथों
तक
मुझे
क्या
इल्म
था
ख़ंजर
बनाती
थी
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SIDDHARTH SHARMA
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ख़ुदा
कुछ
सोच
कर
तूफाँ
बनाता
है
दुआएँ
दे
उसे
वो
माँ
बनाता
है
ख़ुशी
में
वो
अता
करता
है
सबको
माँ
जो
ना-ख़ुश
हो
तो
फिर
बिन
माँ
बनाता
है
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SIDDHARTH SHARMA
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शे'रों
को
आँखें
करना
हैं
मिसरों
में
पानी
भरना
हैं
जितने
हैं
पत्थर
दुनिया
में
उतने
ही
बस
दिल
करना
हैं
ग़ज़लों
में
जीना
है
हमको
पन्नों
में
जा
के
मरना
है
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SIDDHARTH SHARMA
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बनाने
वालों
ने
इक
बार
ढाला
छत
मेरी
माँ
रोज़
उठ
कर
घर
बनाती
है
माँ
दर्जा
ईश्वर
का
राम
को
देती
मेरे
कान्हा
को
भी
सुंदर
बनाती
है
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SIDDHARTH SHARMA
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