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SIDDHARTH SHARMA
sheron ko aañkhen karna hain
sheron ko aañkhen karna hain | शे'रों को आँखें करना हैं
- SIDDHARTH SHARMA
शे'रों
को
आँखें
करना
हैं
मिसरों
में
पानी
भरना
हैं
जितने
हैं
पत्थर
दुनिया
में
उतने
ही
बस
दिल
करना
हैं
ग़ज़लों
में
जीना
है
हमको
पन्नों
में
जा
के
मरना
है
- SIDDHARTH SHARMA
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मैं
हर
शख़्स
के
चेहरे
को
बस
इस
उम्मीद
से
तकता
हूँ
शायद
से
मुझको
दो
आँखें
तेरे
जैसी
दिख
जाएँ
Siddharth Saaz
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न
करो
बहस
हार
जाओगी
हुस्न
इतनी
बड़ी
दलील
नहीं
Jaun Elia
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मुझे
आँखें
दिखाकर
बोलती
है
चुप
रहो
भैया
बहिन
छोटी
भले
हो
बात
वो
अम्मा
सी
करती
है
Divy Kamaldhwaj
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नज़र
में
रखना
कहीं
कोई
ग़म
शनास
गाहक
मुझे
सुख़न
बेचना
है
ख़र्चा
निकालना
है
Umair Najmi
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तू
जो
हर
रोज़
नए
हुस्न
पे
मर
जाता
है
तू
बताएगा
मुझे
इश्क़
है
क्या
जाने
दे
Ali Zaryoun
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हाए
उसके
हाथ
पीले
होने
का
ग़म
इतना
रोए
हैं
कि
आँखें
लाल
कर
ली
Harsh saxena
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वो
आँखें
आपके
ग़म
में
नहीं
हुई
हैं
नम
दिया
जलाते
हुए
हाथ
जल
गया
होगा
Shadab Javed
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वो
आँखें
बुझ
चुकी
होंगी
नज़ारा
हो
चुका
होगा
'अली'
वो
शख़्स
अब
दुनिया
को
प्यारा
हो
चुका
होगा
Ali Zaryoun
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कोई
चेहरा
किसी
को
उम्र
भर
अच्छा
नहीं
लगता
हसीं
है
चाँद
भी,
शब
भर
मगर
अच्छा
नहीं
लगता
Munawwar Rana
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एक
ही
बार
नज़र
पड़ती
है
उन
पर
‘ताबिश’
और
फिर
वो
ही
लगातार
नज़र
आते
हैं
Zubair Ali Tabish
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ख़ुदा
कुछ
सोच
कर
तूफाँ
बनाता
है
दुआएँ
दे
उसे
वो
माँ
बनाता
है
ख़ुशी
में
वो
अता
करता
है
सबको
माँ
जो
ना-ख़ुश
हो
तो
फिर
बिन
माँ
बनाता
है
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SIDDHARTH SHARMA
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मेरा
चेहरा
कभी
दिन
भर
बनाती
थी
कभी
वो
जाग
कर
दफ़्तर
बनाती
थी
सुनो
मैं
ऐसी
इक
लड़की
से
वाक़िफ़
था
धड़कते
दिल
को
जो
पत्थर
बनाती
थी
कलेजा
ले
गया
मैं
उसके
हाथों
तक
मुझे
क्या
इल्म
था
ख़ंजर
बनाती
थी
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SIDDHARTH SHARMA
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ख़ुदा
ने
है
किया
इस
इश्क़
को
मुश्किल
वही
मुश्किल
को
फिर
आसाँ
बनाता
है
मुहब्बत
के
सभी
क़िस्से
बुने
उसने
वही
दो
जिस्म
को
इक
जाँ
बनाता
है
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SIDDHARTH SHARMA
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दिल
ज़रा
है
तेरा
भला
न
लगे
है
बुरा
ख़ूब
पर
बुरा
न
लगे
तू
जिसे
प्यार
करता
है
उसे
कह
प्यार
तेरा
उसे
वफ़ा
न
लगे
तू
छुए
फूल
तो
वो
मर
जाए
चू
में
जिसको
उसे
दवा
न
लगे
तेरी
ख़ातिर
दु'आ
मैं
करता
हूँ
कि
तुझे
मेरी
बद्दुआ
न
लगे
नाम
'साहिर'
तेरा
नहीं
लेता
सब
लगे
पर
तू
बे-वफ़ा
न
लगे
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SIDDHARTH SHARMA
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उसे
क्या
ही
पता
होगा
इबादत
किस
को
कहते
है
मुझे
पूछा
जो
करती
थी
मोहब्बत
किस
को
कहते
है
सभी
वादें
सभी
क़स
में
सनम
निकले
महज़
क़िस्से
तसव्वुर
से
मैं
ने
सीखा
हक़ीक़त
किस
को
कहते
है
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SIDDHARTH SHARMA
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