raat ki tum chaandni mahtaab ho tum | रात की तुम चाँदनी महताब हो तुम

  - Shubham Vaishnav
रातकीतुमचाँदनीमहताबहोतुम
तुमहक़ीक़तऔरमेराख़्वाबहोतुम
गर्मसहरासायहाँतपताहुआमैं
नर्मगुलशनसीवहाँशादाबहोतुम
झीलजैसीतुमकभीठहरीहुईसी
फिरकभीतोलगताहैसैलाबहोतुम
इनहवाओंमेंकिसीधुनकीतरहमैं
गुनगुनातेसाज़कीमिज़राबहोतुम
क्यूँँदिल-ए-नादाँसमझपातानहींकुछ
क्यूँँ‘शुभम’किसकेलिएबे-ताबहोतुम
  - Shubham Vaishnav
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