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Shobhit Dixit
dekho shaitaan bura hota hai
dekho shaitaan bura hota hai | देखो शैतान बुरा होता है
- Shobhit Dixit
देखो
शैतान
बुरा
होता
है
उस
सेे
इंसान
बुरा
होता
है
सबके
मजहब
अच्छे
होते
हैं
किसका
भगवान
बुरा
होता
है
इश्क़
मोहब्बत
प्यार
वगैरा
मत
कर
नादान
बुरा
होता
है
गाड़ी
जीवन
की
तेज
चलाओ
लेकिन
चालान
बुरा
होता
है
दरख़्त
में
क्या
अच्छा
ख़राब
वो
तो
बागान
बुरा
होता
है
- Shobhit Dixit
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आग
थे
इब्तिदा-ए-इश्क़
में
हम
अब
जो
हैं
ख़ाक
इंतिहा
है
ये
Meer Taqi Meer
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मैं
बाल
बाल
बच
गया
हर
बार
इश्क़
से
सर
के
बहुत
क़रीब
से
पत्थर
गुज़र
गए
Umair Najmi
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इश्क़
से
तबीअत
ने
ज़ीस्त
का
मज़ा
पाया
दर्द
की
दवा
पाई
दर्द-ए-बे-दवा
पाया
Mirza Ghalib
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हुस्न
को
शर्मसार
करना
ही
इश्क़
का
इंतिक़ाम
होता
है
Asrar Ul Haq Majaz
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परेशाँ
है
वो
झूटा
इश्क़
कर
के
वफ़ा
करने
की
नौबत
आ
गई
है
Fahmi Badayuni
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इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
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Vikram Gaur Vairagi
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सर्दी
और
गर्मी
के
उज़्र
नहीं
चलते
मौसम
देख
के
साहब
इश्क़
नहीं
होता
Moin Shadab
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क्या
कहूँ
तुम
से
मैं
कि
क्या
है
इश्क़
जान
का
रोग
है
बला
है
इश्क़
Meer Taqi Meer
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इश्क़
में
जी
को
सब्र
ओ
ताब
कहाँ
उस
से
आँखें
लड़ीं
तो
ख़्वाब
कहाँ
Meer Taqi Meer
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नींद
के
दायरे
में
हाज़िर
हूँ
ख़्वाब
के
रास्ते
में
हाज़िर
हूँ
याद
है
इश्क़
था
कभी
मुझ
सेे
मैं
उसी
सिलसिले
में
हाज़िर
हूँ
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Ejaz Tawakkal Khan
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पेड़
हमारे
ऊपर
साया
करते
थे
हम
धूपों
को
गले
लगाया
करते
थे
बादल
वादल
हम
सेे
ऐसे
रूठे
थे
आँखों
से
पानी
बरसाया
करते
थे
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Shobhit Dixit
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काग़ज़
की
नाव
बनाते
थे
और
उस
पर
भी
इतराते
थे
अब
तो
छुट्टी
भर
है
बस
तब
दीवाली
यार
मनाते
थे
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Shobhit Dixit
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हमने
होकर
देख
लिया
है
तू
भी
देख
चुनिंदा
होकर
आँसू
से
भीगी
आँखों
का
इक
बारी
बाशिंदा
होकर
चैन
नहीं
मिल
पाता
है
चाहे
जितना
भी
ऊँचा
उड़
लो
बात
न
मानो
मेरी
तो
फिर
देखो
ख़ुद
से
परिंदा
होकर
जैसा
फ़िल्मों
में
होता
है
बचपन
से
वैसी
ख़्वाहिश
है
मुझको
भी
मिल
जाओ
पापा
तुम
वैसे
ही
ज़िंदा
होकर
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Shobhit Dixit
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छत
पे
जाने
को
बोल
रहे
हैं
फिर
तह
ख़ानों
को
खोल
रहे
हैं
दस्तक
देने
में
डर
लगता
है
सो
खुल
जा
सिम
सिम
बोल
रहे
हैं
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Shobhit Dixit
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उम्मीद
रहे
बाकी,
बाकी
सब
चला
जाए
कोई
छला
हुआ
आख़िर
कितना
छला
जाए
माचिस
तीली
चिंगारी
से
कोई
राबता
नहीं
कोई
उसके
हाथ
पकड़े
और
मुझे
जला
जाए
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Shobhit Dixit
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