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Asad Khan
hamaare apnon ko jaata bhi dekha
hamaare apnon ko jaata bhi dekha | हमारे अपनों को जाता भी देखा
- Asad Khan
हमारे
अपनों
को
जाता
भी
देखा
फिर
उनका
बाद
में
रस्ता
भी
देखा
जिसे
सोने
से
पहले
देखा
मैंने
उसी
को
ख़्वाब
में
मरता
भी
देखा
- Asad Khan
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देख
कर
ईद
का
चाॅंद
मैं
करता
क्या
तेरी
तस्वीर
तो
कमरे
में
रक्खी
है
Asad Khan
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ये
तेरे
ख़्वाब
से
जुड़ी
हुई
है
नींद
जो
आँख
में
भरी
हुई
है
मेरे
तो
सारे
ज़ख़्म
ताज़ा
हैं
आपकी
चोट
ही
सड़ी
हुई
है
ऐसा
क्या
काम
है
तुझे
ऐ
दोस्त
जाने
की
जल्दी
क्यूँ
लगी
हुई
है
आज
भी
इंतिज़ार
में
तेरे
इक
घड़ी
मेज़
पर
पड़ी
हुई
है
चंद
नोटों
के
नीचे
बटवे
में
उसकी
तस्वीर
भी
रखी
हुई
है
दिल
को
पत्थर
बना
के
रक्खा
है
ज़िंदगी
ठाठ
पे
अड़ी
हुई
है
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Asad Khan
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ये
तेरे
ख़्वाब
से
जुड़ी
हुई
है
नींद
जो
आँख
में
भरी
हुई
है
मेरे
तो
सारे
ज़ख़्म
ताज़ा
हैं
आपकी
चोट
तो
सड़ी
हुई
है
ऐसा
क्या
काम
है
तुझे
ऐ
दोस्त
जाने
की
जल्दी
क्यूँ
लगी
हुई
है
आज
भी
इंतिज़ार
में
तेरे
इक
घड़ी
मेज़
पर
पड़ी
हुई
है
चंद
नोटों
के
नीचे
बटवे
में
उसकी
तस्वीर
भी
रखी
हुई
है
दिल
को
पत्थर
बना
के
रक्खा
है
ज़िंदगी
ठाठ
पे
अड़ी
हुई
है
कैसे
सर
पे
चढ़ूॅं
मैं
दुनिया
के
ये
तो
ख़ुद
में
बहुत
गिरी
हुई
है
वर्ना
वो
ऐसा
क्यूँ
करेगा
भला
आज
उसने
शराब
पी
हुई
है
कैसे
कह
दूॅं
उसे
मोहब्बत
नइॅं
ग़म-ए-फ़ुर्क़त
से
वो
दुखी
हुई
है
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Asad Khan
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रस्ते
में
आने
वाली
ठोकर
बना
दिया
है
इस
ज़िंदगी
ने
मुझको
पत्थर
बना
दिया
है
उसने
कहा
के
ख़्वाहिश
ज़ाहिर
करो
सो
मैंने
उसकी
जबीं
को
चूमा
और
घर
बना
दिया
है
मैंने
तो
धूप
से
डर
के
थामा
था
शजर
को
हालात
ने
उसी
का
शौहर
बना
दिया
है
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Asad Khan
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लड़
पड़ेंगे
लोग
सो
बातें
फ़सादी
नइॅं
करूँँगा
इस
ख़राबे
में
ज़ियादा
और
ख़राबी
नइॅं
करूँँगा
Asad Khan
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