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Asad Khan
dekh kar eed ka chaand main karta kya
dekh kar eed ka chaand main karta kya | देख कर ईद का चाॅंद मैं करता क्या
- Asad Khan
देख
कर
ईद
का
चाॅंद
मैं
करता
क्या
तेरी
तस्वीर
तो
कमरे
में
रक्खी
है
- Asad Khan
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सोच
समझ
कर
देख
लिया
है
क्या
बोलूँ
तुझ
को
तो
हर
बात
बुरी
लग
जाती
है
Sohil Barelvi
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हमने
ही
लौटने
का
इरादा
नहीं
किया
उसने
भी
भूल
जाने
का
वा'दा
नहीं
किया
Parveen Shakir
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मैं
वहाँ
हूँ
जहाँ
नहीं
कोई
कुछ
नहीं
था
जहाँ
वहाँ
मैं
था
Ejaz Azmi
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एक
दरवेश
को
तिरी
ख़ातिर
सारी
बस्ती
से
इश्क़
हो
गया
है
Ammar Iqbal
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गाहे
गाहे
बस
अब
यही
हो
क्या
तुम
सेे
मिलकर
बहुत
ख़ुशी
हो
क्या
Jaun Elia
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जहाँ
से
लौटना
मुमकिन
नहीं
है
कुछ
ऐसे
मोड़
हैं
उसके
बदन
में
Siddharth Saaz
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गिफ़्ट
कर
देता
हूँ
उसको
मैं
किताबें,
लेकिन
उनको
पढ़
लेने
की
मोहलत
नहीं
देता
उसको
Harman Dinesh
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किस
तरह
'अमानत'
न
रहूँ
ग़म
से
मैं
दिल-गीर
आँखों
में
फिरा
करती
है
उस्ताद
की
सूरत
Amanat Lakhnavi
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हुस्न
ने
शौक़
के
हंगा
में
तो
देखे
थे
बहुत
इश्क़
के
दावा-ए-तक़दीस
से
डर
जाना
था
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Asrar Ul Haq Majaz
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हम
तोहफ़े
में
घड़ियाँ
तो
दे
देते
हैं
एक
दूजे
को
वक़्त
नहीं
दे
पाते
हैं
आँखें
ब्लैक
एंड
व्हाइट
हैं
तो
फिर
इन
में
रंग
बिरंगे
ख़्वाब
कहाँ
से
आते
हैं?
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Fareeha Naqvi
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ये
तेरे
ख़्वाब
से
जुड़ी
हुई
है
नींद
जो
आँख
में
भरी
हुई
है
मेरे
तो
सारे
ज़ख़्म
ताज़ा
हैं
आपकी
चोट
तो
सड़ी
हुई
है
ऐसा
क्या
काम
है
तुझे
ऐ
दोस्त
जाने
की
जल्दी
क्यूँ
लगी
हुई
है
आज
भी
इंतिज़ार
में
तेरे
इक
घड़ी
मेज़
पर
पड़ी
हुई
है
चंद
नोटों
के
नीचे
बटवे
में
उसकी
तस्वीर
भी
रखी
हुई
है
दिल
को
पत्थर
बना
के
रक्खा
है
ज़िंदगी
ठाठ
पे
अड़ी
हुई
है
कैसे
सर
पे
चढ़ूॅं
मैं
दुनिया
के
ये
तो
ख़ुद
में
बहुत
गिरी
हुई
है
वर्ना
वो
ऐसा
क्यूँ
करेगा
भला
आज
उसने
शराब
पी
हुई
है
कैसे
कह
दूॅं
उसे
मोहब्बत
नइॅं
ग़म-ए-फ़ुर्क़त
से
वो
दुखी
हुई
है
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Asad Khan
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लड़
पड़ेंगे
लोग
सो
बातें
फ़सादी
नइॅं
करूँँगा
इस
ख़राबे
में
ज़ियादा
और
ख़राबी
नइॅं
करूँँगा
Asad Khan
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हर
ज़िन्दगी
की
ये
ज़रूरत
होती
है
यूँँॅं
ही
नहीं
हमको
मुहब्बत
होती
है
कोई
न
कोई
हादसा
भी
चाहिए
तब
जा
के
लोगों
से
इबादत
होती
है
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Asad Khan
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जुदा
होने
वाले
मेरी
बात
तो
सुन
तू
आ
या
न
आ,
तेरी
याद
आ
रही
है
Asad Khan
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फूल
पर
मानो
तितलियाँ
नहीं
हैं
जिसके
भी
घर
में
बेटियाँ
नहीं
हैं
ज़िंदगी
ऐसी
खेल
है
जिस
में
साँप
हैं
और
सीढ़ियाँ
नहीं
हैं
मुझको
बारिश
अज़ीज़
है
यारों
यूँँॅं
ही
कहता
हूॅं
छतरियाँ
नहीं
हैं
उसको
बच्चों
के
साथ
देखा
था
उसके
हाथों
में
चूड़ियाँ
नहीं
हैं
मेरे
इक
बोसे
से
खुलेगी
वो
उस
तिजोरी
की
चाबियाँ
नहीं
हैं
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Asad Khan
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