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Asad Khan
ye tere KHvaab se ju
ye tere KHvaab se ju | ये तेरे ख़्वाब से जुड़ी हुई है
- Asad Khan
ये
तेरे
ख़्वाब
से
जुड़ी
हुई
है
नींद
जो
आँख
में
भरी
हुई
है
मेरे
तो
सारे
ज़ख़्म
ताज़ा
हैं
आपकी
चोट
ही
सड़ी
हुई
है
ऐसा
क्या
काम
है
तुझे
ऐ
दोस्त
जाने
की
जल्दी
क्यूँ
लगी
हुई
है
आज
भी
इंतिज़ार
में
तेरे
इक
घड़ी
मेज़
पर
पड़ी
हुई
है
चंद
नोटों
के
नीचे
बटवे
में
उसकी
तस्वीर
भी
रखी
हुई
है
दिल
को
पत्थर
बना
के
रक्खा
है
ज़िंदगी
ठाठ
पे
अड़ी
हुई
है
- Asad Khan
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इक
पल
का
क़ुर्ब
एक
बरस
का
फिर
इंतिज़ार
आई
है
जनवरी
तो
दिसम्बर
चला
गया
Rukhsaar Nazimabadi
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था
इंतिज़ार
मनाएँगे
मिल
के
दीवाली
न
तुम
ही
लौट
के
आए
न
वक़्त-ए-शाम
हुआ
Aanis Moin
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हमें
भी
आज
ही
करना
था
इंतिज़ार
उस
का
उसे
भी
आज
ही
सब
वादे
भूल
जाने
थे
Aashufta Changezi
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शब-ए-इंतिज़ार
की
कश्मकश
में
न
पूछ
कैसे
सहर
हुई
कभी
इक
चराग़
जला
दिया
कभी
इक
चराग़
बुझा
दिया
Majrooh Sultanpuri
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थक
गए
हम
करते
करते
इंतिज़ार
इक
क़यामत
उन
का
आना
हो
गया
Akhtar Shirani
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ये
कैसा
नश्शा
है
मैं
किस
अजब
ख़ुमार
में
हूँ
तू
आ
के
जा
भी
चुका
है
मैं
इंतिज़ार
में
हूँ
Muneer Niyazi
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ये
दाग़
दाग़
उजाला
ये
शब-गज़ीदा
सहर
वो
इंतिज़ार
था
जिस
का
ये
वो
सहर
तो
नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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चेहरे
को
आज
तक
भी
तेरा
इंतिज़ार
है
हम
ने
गुलाल
और
को
मलने
नहीं
दिया
Kunwar Bechain
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रूह
मेरी
अब
करेगी
इंतिज़ार
क़ब्र
में
ये
फ़ोन
भी
रख
दीजिए
Tanoj Dadhich
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जानता
है
कि
वो
न
आएँगे
फिर
भी
मसरूफ़-ए-इंतिज़ार
है
दिल
Faiz Ahmad Faiz
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दुख
में
याद
आती
है
उसी
की
मुझे
कितने
रस्ते
हैं
इक
गली
की
तरफ़
Asad Khan
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हमारे
अपनों
को
जाता
भी
देखा
फिर
उनका
बाद
में
रस्ता
भी
देखा
जिसे
सोने
से
पहले
देखा
मैंने
उसी
को
ख़्वाब
में
मरता
भी
देखा
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Asad Khan
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जीने
की
बात
चल
रही
है
दोस्त
ज़िंदगी
क्यूँ
मचल
रही
है
दोस्त
वस्ल
के
दिन
है
और
ख़ाली
है
जेब
सो
मुलाक़ात
टल
रही
है
दोस्त
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Asad Khan
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दिल
परेशान
भी
गुज़र
जाता
तेरा
तूफ़ान
भी
गुज़र
जाता
तू
जो
लौट
आता
चाँद
रात
अगर
मेरा
रमज़ान
भी
गुज़र
जाता
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Asad Khan
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फूल
पर
मानो
तितलियाँ
नहीं
हैं
जिसके
भी
घर
में
बेटियाँ
नहीं
हैं
ज़िंदगी
ऐसी
खेल
है
जिस
में
साँप
हैं
और
सीढ़ियाँ
नहीं
हैं
मुझको
बारिश
अज़ीज़
है
यारों
यूँँॅं
ही
कहता
हूॅं
छतरियाँ
नहीं
हैं
उसको
बच्चों
के
साथ
देखा
था
उसके
हाथों
में
चूड़ियाँ
नहीं
हैं
मेरे
इक
बोसे
से
खुलेगी
वो
उस
तिजोरी
की
चाबियाँ
नहीं
हैं
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Asad Khan
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