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Asad Khan
jeene kii baat chal rahi hai dost
jeene kii baat chal rahi hai dost | जीने की बात चल रही है दोस्त
- Asad Khan
जीने
की
बात
चल
रही
है
दोस्त
ज़िंदगी
क्यूँ
मचल
रही
है
दोस्त
वस्ल
के
दिन
है
और
ख़ाली
है
जेब
सो
मुलाक़ात
टल
रही
है
दोस्त
- Asad Khan
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सखी
को
हमारी
नज़र
लग
न
जाए
उसे
ख़्वाब
में
रात
भर
देखते
हैं
Sahil Verma
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एक
ही
नदी
के
हैं
ये
दो
किनारे
दोस्तो
दोस्ताना
ज़िंदगी
से
मौत
से
यारी
रखो
Rahat Indori
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मैं
दिल
को
सख़्त
करके
उस
गली
जा
तो
रहा
हूँ
दोस्त
करूँँगा
क्या
अगर
वो
ही
शरारत
पर
उतर
आया
Harsh saxena
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दिन
सलीक़े
से
उगा
रात
ठिकाने
से
रही
दोस्ती
अपनी
भी
कुछ
रोज़
ज़माने
से
रही
Nida Fazli
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अब
उस
सेे
दोस्ती
है
जिस
सेे
कल
मुहब्बत
थी
अब
इस
सेे
ज़्यादा
बुरा
वक़्त
कुछ
नहीं
है
दोस्त
Vishal Singh Tabish
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दुश्मनी
कर
मगर
उसूल
के
साथ
मुझ
पर
इतनी
सी
मेहरबानी
हो
मेरे
में'यार
का
तक़ाज़ा
है
मेरा
दुश्मन
भी
ख़ानदानी
हो
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Akhtar Shumar
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पहले
रूठा
यार
मनाना
होता
है
फिर
कोई
त्योहार
मनाना
होता
है
Hasan Raqim
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कब
लौटा
है
बहता
पानी
बिछड़ा
साजन
रूठा
दोस्त
हम
ने
उस
को
अपना
जाना
जब
तक
हाथ
में
दामाँ
था
Ibn E Insha
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खुशियाँ
उसी
के
साथ
हैं
जो
ग़म
गुसार
है
ऐसे
हरेक
शख़्स
ही
दुनिया
का
यार
है
Sunny Seher
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कौन
रोता
है
किसी
और
की
ख़ातिर
ऐ
दोस्त
सब
को
अपनी
ही
किसी
बात
पे
रोना
आया
Sahir Ludhianvi
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रस्ते
में
आने
वाली
ठोकर
बना
दिया
है
इस
ज़िंदगी
ने
मुझको
पत्थर
बना
दिया
है
उसने
कहा
के
ख़्वाहिश
ज़ाहिर
करो
सो
मैंने
उसकी
जबीं
को
चूमा
और
घर
बना
दिया
है
मैंने
तो
धूप
से
डर
के
थामा
था
शजर
को
हालात
ने
उसी
का
शौहर
बना
दिया
है
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Asad Khan
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इस
जवानी
का
फ़साना
भूल
जाऊॅं
ज़ख़्मी
हूॅं
तो
दिल
लगाना
भूल
जाऊॅं
यानी
तुझको
याद
करना
बंद
कर
दूॅं
यानी
मेरी
जाँ
मैं
खाना
भूल
जाऊॅं
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Asad Khan
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तितलियों
में
क़याम
था
मेरा
कितना
ऊँचा
मक़ाम
था
मेरा
दाल
रोटी
निकाल
लेता
था
शा'इरी
करना
काम
था
मेरा
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Asad Khan
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ज़बाँ
तो
उसकी
भी
हकला
रही
थी
मेरी
गाड़ी
भी
छूटे
जा
रही
थी
मुहब्बत
वो
भी
ग़ुर्बत
में
मुहब्बत
कमाई
आ
रही
थी
जा
रही
थी
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Asad Khan
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फूल
पर
मानो
तितलियाँ
नहीं
हैं
जिसके
भी
घर
में
बेटियाँ
नहीं
हैं
ज़िंदगी
ऐसी
खेल
है
जिस
में
साँप
हैं
और
सीढ़ियाँ
नहीं
हैं
मुझको
बारिश
अज़ीज़
है
यारों
यूँँॅं
ही
कहता
हूॅं
छतरियाँ
नहीं
हैं
उसको
बच्चों
के
साथ
देखा
था
उसके
हाथों
में
चूड़ियाँ
नहीं
हैं
मेरे
इक
बोसे
से
खुलेगी
वो
उस
तिजोरी
की
चाबियाँ
नहीं
हैं
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Asad Khan
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