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Asad Khan
is jawaani ka fasana bhool jaoon
is jawaani ka fasana bhool jaoon | इस जवानी का फ़साना भूल जाऊॅं
- Asad Khan
इस
जवानी
का
फ़साना
भूल
जाऊॅं
ज़ख़्मी
हूॅं
तो
दिल
लगाना
भूल
जाऊॅं
यानी
तुझको
याद
करना
बंद
कर
दूॅं
यानी
मेरी
जाँ
मैं
खाना
भूल
जाऊॅं
- Asad Khan
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ठीक
से
ज़ख़्म
का
अंदाज़ा
किया
ही
किसने
बस
सुना
था
कि
बिछड़ते
हैं
तो
मर
जाते
हैं
Shariq Kaifi
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ख़ून
से
सींची
है
मैं
ने
जो
ज़मीं
मर
मर
के
वो
ज़मीं
एक
सितम-गर
ने
कहा
उस
की
है
Javed Akhtar
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वो
बड़े
प्यार
से
कहते
हैं
कि
आप
अपने
हैं
और
अपनों
को
ही
तो
ज़ख़्म
दिए
जाते
हैं
Akash Rajpoot
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अक्सर
ही
ज़ख़्म
इश्क़
में
पाले
हैं
औरतें
पर
कितने
टूटे
मर्द
सँभाले
हैं
औरतें
Abhishar Geeta Shukla
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पूरी
कायनात
में
एक
क़ातिल
बीमारी
की
हवा
हो
गई
वक़्त
ने
कैसा
सितम
ढाया
कि
दूरियाँ
ही
दवा
हो
गईं
Unknown
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ये
इत्तिफ़ाक़
ज़रूरी
नहीं
दोबारा
हो
मैं
तुम
को
सोचने
बैठूँ
तो
ज़ख़्म
भर
जाएँ
Abhishek shukla
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ये
तो
बढ़ती
ही
चली
जाती
है
मीआद-ए-सितम
ज़ुज़
हरीफ़ान-ए-सितम
किस
को
पुकारा
जाए
वक़्त
ने
एक
ही
नुक्ता
तो
किया
है
तालीम
हाकिम-ए-वक़त
को
मसनद
से
उतारा
जाए
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Jaun Elia
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मैं
चोट
कर
तो
रहा
हूँ
हवा
के
माथे
पर
मज़ा
तो
जब
था
कि
कोई
निशान
भी
पड़ता
Abhishek shukla
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है
ये
कैसा
सितम
मौला
ये
हैं
दुश्वारियाँ
कैसी
जहाँ
पर
रोना
था
हमको
वहीं
पर
मुस्कुराना
है
Aqib khan
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शाख़-दर-शाख़
होती
है
ज़ख़्मी
जब
परिंदा
शिकार
होता
है
Indira Varma
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वो
मेरी
आँखों
में
डर
देखता
है
यक़ीनन
मुझ
से
बेहतर
देखता
है
Asad Khan
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कभी
लौटी
नहीं
फिर
वो
कलाई
अभी
तक
बैठा
हूॅं
कंगन
सँभाले
Asad Khan
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क्या
ज़रूरी
है
शब-ए-वस्ल
में
जागा
जाए
क्या
ज़रूरी
है
हमेशा
दिए
जलते
रक्खें
Asad Khan
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दुख
में
याद
आती
है
उसी
की
मुझे
कितने
रस्ते
हैं
इक
गली
की
तरफ़
Asad Khan
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सब
शुरू
में
हम
सेे
अच्छा
बोलते
हैं
बेसबब
फिर
उल्टा
सीधा
बोलते
हैं
आज
इक
चिड़िया
ने
मुझको
ये
बताया
पेड़
इक
दूजे
से
कितना
बोलते
हैं
दोस्त
कुछ
ऐसे
मिले
हैं
इस
सफ़र
में
शे'र
कैसा
भी
हो
अच्छा
बोलते
हैं
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Asad Khan
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