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Shajar Abbas
sharf imaam jo denge shajar ziyaarat ka
sharf imaam jo denge shajar ziyaarat ka | शरफ़ इमाम जो देंगे शजर ज़ियारत का
- Shajar Abbas
शरफ़
इमाम
जो
देंगे
शजर
ज़ियारत
का
नजफ़
से
जाऊँगा
पैदल
में
कर्बला
के
लिए
- Shajar Abbas
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इसी
से
जान
गया
मैं
कि
बख़्त
ढलने
लगे
मैं
थक
के
छाँव
में
बैठा
तो
पेड़
चलने
लगे
मैं
दे
रहा
था
सहारे
तो
इक
हुजूम
में
था
जो
गिर
पड़ा
तो
सभी
रास्ता
बदलने
लगे
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Farhat Abbas Shah
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पेड़
को
काटने
वाले
क्या
जाने
दुख
हम
गले
लग
नहीं
सकते
दीवार
से
Neeraj Neer
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ये
सोच
के
माँ
बाप
की
ख़िदमत
में
लगा
हूँ
इस
पेड़
का
साया
मिरे
बच्चों
को
मिलेगा
Munawwar Rana
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पेड़
के
काटने
वालों
को
ये
मालूम
तो
था
जिस्म
जल
जाएँगे
जब
सर
पे
न
साया
होगा
Kaifi Azmi
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इसलिए
भी
इस
शजर
से
सबको
इतना
प्यार
है
दे
रहा
है
फल
अभी
ये
और
सायादार
है
ऐ
ख़ुदा
इस
ना-ख़ुदा
की
ख़ैर
हो
ये
नासमझ
ये
समझता
है
कि
इसके
हाथ
में
पतवार
है
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Vashu Pandey
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वो
पास
क्या
ज़रा
सा
मुस्कुरा
के
बैठ
गया
मैं
इस
मज़ाक़
को
दिल
से
लगा
के
बैठ
गया
दरख़्त
काट
के
जब
थक
गया
लकड़हारा
तो
इक
दरख़्त
के
साए
में
जा
के
बैठ
गया
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Zubair Ali Tabish
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तेरी
निगाह-ए-नाज़
से
छूटे
हुए
दरख़्त
मर
जाएँ
क्या
करें
बता
सूखे
हुए
दरख़्त
हैरत
है
पेड़
नीम
के
देने
लगे
हैं
आम
पगला
गए
हैं
आपके
चू
में
हुए
दरख़्त
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Varun Anand
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एक
साया
है
घने
पेड़
का
मेरे
सर
पर
एक
आँचल
से
मुझे
ठंडी
हवा
आती
है
Binte Reshma
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वो
मेरी
दुनिया
का
हिस्सा
थी
मेरी
दुनिया
नहीं
इक
शजर
कटने
से
वन
वीरान
हो
जाएगा
क्या
Balmohan Pandey
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दरख़्त
काट
के
जब
थक
गया
लकड़हारा
तो
इक
दरख़्त
के
साए
में
जा
के
बैठ
गया
Zubair Ali Tabish
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देखकर
मुझको
वो
सखियों
से
कहा
करती
थी
सब
सेे
अच्छा
मुझे
कॉलेज
में
'शजर'
लगता
है
Shajar Abbas
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मुझको
उसने
दे
के
तोहफ़े
में
घड़ी
ये
कहा
कि
वक़्त
की
इज़्ज़त
करो
Shajar Abbas
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सोचते
तो
हैं
ख़ुद-कुशी
के
लिए
सोचते
हैं
फ़क़त
करेंगे
नहीं
हिज्र
में
जान
देना
ठीक
है
पर
हम
तिरे
हिज्र
में
मरेंगे
नहीं
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Shajar Abbas
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वो
उसके
गाल
पे
दरबान-ए-हुस्न
बैठा
है
कोई
उसे
सुनो
तिल
का
निशान
मत
कहना
Shajar Abbas
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तुम्हारे
हुस्न
की
ता'रीफ़
लिखने
बैठूँ
अगर
क़सम
ख़ुदा
की
हज़ारों
बरस
भी
कम
होंगे
Shajar Abbas
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