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Shajar Abbas
dekhkar mujhko vo sakhiyon se kaha karti thii
dekhkar mujhko vo sakhiyon se kaha karti thii | देखकर मुझको वो सखियों से कहा करती थी
- Shajar Abbas
देखकर
मुझको
वो
सखियों
से
कहा
करती
थी
सब
सेे
अच्छा
मुझे
कॉलेज
में
'शजर'
लगता
है
- Shajar Abbas
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ये
सोच
के
माँ
बाप
की
ख़िदमत
में
लगा
हूँ
इस
पेड़
का
साया
मिरे
बच्चों
को
मिलेगा
Munawwar Rana
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इस
रास्ते
में
जब
कोई
साया
न
पाएगा
ये
आख़िरी
दरख़्त
बहुत
याद
आएगा
Azhar Inayati
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एक
साया
है
घने
पेड़
का
मेरे
सर
पर
एक
आँचल
से
मुझे
ठंडी
हवा
आती
है
Binte Reshma
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अजीब
दर्द
का
रिश्ता
था
सब
के
सब
रोए
शजर
गिरा
तो
परिंदे
तमाम
शब
रोए
Tariq Naeem
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लो
चाँद
हो
गया
नमू
माह-ए-ख़राम
का
ऐ
मोमिनों
लिबास-ए-सियाह
ज़ेब-ए-तन
करो
फ़र्श-ए-अज़ा
बिछा
के
अज़ाख़ाने
में
शजर
अब
सुब्ह-ओ-शाम
ज़िक्र-ए-ग़रीब-उल-वतन
करो
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Shajar Abbas
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कुछ
भी
नहीं
तो
पेड़
की
तस्वीर
ही
सही
घर
में
थोड़ी
बहुत
तो
हरियाली
चाहिये
Himanshu Kiran Sharma
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मुनफ़रिद
ख़ुशबू
है
इस
शजर
की
ऐसा
लगता
है
उसने
छुआ
हो
Shadab khan
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तेरे
लगाए
हुए
ज़ख़्म
क्यूँँ
नहीं
भरते
मेरे
लगाए
हुए
पेड़
सूख
जाते
हैं
Tehzeeb Hafi
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पेड़
मुझे
हसरत
से
देखा
करते
थे
मैं
जंगल
में
पानी
लाया
करता
था
Tehzeeb Hafi
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तेरी
निगाह-ए-नाज़
से
छूटे
हुए
दरख़्त
मर
जाएँ
क्या
करें
बता
सूखे
हुए
दरख़्त
हैरत
है
पेड़
नीम
के
देने
लगे
हैं
आम
पगला
गए
हैं
आपके
चू
में
हुए
दरख़्त
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Varun Anand
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रब
ही
जाने
क्या
हुआ
है
ख़ैर
हो
हर
कोई
ये
कह
रहा
है
ख़ैर
हो
मैंने
जो
बोला
था
उसकी
शान
में
उसने
वो
सब
सुन
लिया
है
ख़ैर
हो
राह-ज़न
ही
राह-ज़न
हैं
चार
सू
राह
में
इक
क़ाफ़िला
है
ख़ैर
हो
तैश
से
जो
देखा
करता
था
मुझे
मुस्कुराकर
देखता
है
ख़ैर
हो
उसने
ख़त
भेजा
है
बरसों
बाद
में
और
ख़त
में
ये
लिखा
है
ख़ैर
हो
अश्कों
से
दामन
को
अपने
तर
किए
रब
से
वो
महव-ए-दुआ
है
ख़ैर
हो
कल
तलक
जो
दुश्मन-ए-जाँ
था
मेरी
मेरे
हक़
में
बोलता
है
ख़ैर
हो
मौज़ू-ए-चर्चा
है
जिसका
हुस्न
वो
रु-ब-रु-ए
आईना
है
ख़ैर
हो
लब
नहीं
खोले
थे
जिसने
उम्र
भर
वो
लबों
को
खोलता
है
ख़ैर
हो
बे
वफ़ा
इंसान
के
देखो
शजर
होंठो
पे
लफ़्ज़-ए-वफ़ा
है
ख़ैर
हो
हर
घड़ी
जो
हँसता
रहता
है
शजर
हँसता
हँसता
रो
पड़ा
है
ख़ैर
हो
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Shajar Abbas
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ख़ानदानी
हूँ
सो
ग़द्दारी
नहीं
कर
सकता
मैं
मोहब्बत
में
अदाकारी
नहीं
कर
सकता
इश्क़
रग
रग
में
मेरे
जिस्म
की
बहता
है
शजर
जिस्म
से
दूर
ये
बीमारी
नहीं
कर
सकता
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Shajar Abbas
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मैंने
ख़त
में
लिखा
था
आ
जाना
उसने
तस्वीर
भेज
दी
अपनी
Shajar Abbas
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जुज़
दिल
लगी
का
हमने
निकाला
तो
ये
मिला
लम्हों
में
सारी
ज़िंदगी
बर्बाद
हो
गई
हम
पर
तुम्हारे
हिज्र
का
ऐसा
असर
हुआ
दिल
का
सुकून
आँखों
की
बीनाई
खो
गई
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Shajar Abbas
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गुलशन-ए-क़ल्ब
में
मोहब्बत
का
ख़ूब-सूरत
सा
फिर
गुलाब
खिले
बे
वफ़ा
शख़्स
ये
दु'आ
है
मेरी
उम्र
भर
तुझको
बे
वफ़ाई
मिले
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Shajar Abbas
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