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SHABAB ANWAR
shaam ka manzar suh
shaam ka manzar suh | शाम का मंज़र सुहाना होता है
- SHABAB ANWAR
शाम
का
मंज़र
सुहाना
होता
है
तेरी
यादों
को
जो
आना
होता
है
करने
वाले
कर
गुज़रते
हैं
सभी
काहिलों
का
तो
बहाना
होता
है
ख़ामियाँ
फिर
कुछ
नज़र
आती
नहीं
कोई
बंदा
जब
दिवाना
होता
है
देख
ले
वो
मुस्कुरा
के
गर
कभी
दिल
में
ख़ुशियों
का
ठिकाना
होता
है
तेरा
अच्छा
वक़्त
है
तो
क्या
हुआ
दोस्त
'अनवर'
का
ज़माना
होता
है
- SHABAB ANWAR
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वो
हिंदू,
मैं
मुस्लिम,
ये
सिक्ख,
वो
ईसाई
यार
ये
सब
सियासत
है
चलो
इश्क़
करें
Rahat Indori
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उसको
जो
कुछ
भी
कहूँ
अच्छा
बुरा
कुछ
न
करे
यार
मेरा
है
मगर
काम
मेरा
कुछ
न
करे
दूसरी
बार
भी
पड़
जाए
अगर
कुछ
करना
आदमी
पहली
मोहब्बत
के
सिवा
कुछ
न
करे
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Abid Malik
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यार
तस्वीर
में
तन्हा
हूँ
मगर
लोग
मिले
कई
तस्वीर
से
पहले
कई
तस्वीर
के
बा'द
Umair Najmi
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ज़रा
विसाल
के
बाद
आइना
तो
देख
ऐ
दोस्त
तिरे
जमाल
की
दोशीज़गी
निखर
आई
Firaq Gorakhpuri
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रात
दिन
तेरे
साथ
कटते
थे
यार
अब
तुझ
सेे
बात
से
भी
गए
ये
मोहब्बत
भी
किन
दिनों
में
हुई
दिल
मिलाने
थे
हाथ
से
भी
गए
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Kafeel Rana
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यूँँ
लगे
दोस्त
तिरा
मुझ
से
ख़फ़ा
हो
जाना
जिस
तरह
फूल
से
ख़ुशबू
का
जुदा
हो
जाना
Qateel Shifai
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ये
मख़मली
गद्दे
तो
तुझको
ही
मुबारक
हों
ऐ
दोस्त
मुझे
बस
माँ
की
गोद
ही
काफ़ी
है
Harsh saxena
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अब
वो
तितली
है
न
वो
उम्र
तआ'क़ुब
वाली
मैं
न
कहता
था
बहुत
दूर
न
जाना
मिरे
दोस्त
Faisal Ajmi
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अब
पाँसा
यार
न
जाने
कब
हम
पर
फेंका
जाएगा
घुट
घुट
कर
जीना
पड़ता
है
हमको
प्यादा
होने
में
Sandeep dabral 'sendy'
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क्या
कहा
दोस्त
समझना
है
तुम्हें
प्यार
नहीं
यानी
बस
देखना
है
पानी
को
पीना
नहीं
है
Neeraj Neer
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मुझको
कभी
अता
न
हो
जिस
इश्क़
में
वफ़ा
न
हो
हर
बात
तेरी
मानूँगा
बस
मुझ
सेे
तू
ख़फ़ा
न
हो
इक
ज़ख़्म
ऐसा
चाहिए
जिसकी
कोई
दवा
न
हो
इक
बार
मुझ
सेे
तुम
मिलो
और
फिर
कभी
जुदा
न
हो
बन
जाए
वो
फ़रिश्ता
ही
बंदा
अगर
बुरा
न
हो
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SHABAB ANWAR
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ऐसी
भी
कोई
शाम
हो
जिस
में
तू
हम-कलाम
हो
उकता
गया
सभी
से
मैं
कब
ज़िन्दगी
तमाम
हो
हो
नाम
बाद
मरने
के
सो
ऐसा
कोई
काम
हो
लानत
हो
ऐसे
काम
में
जो
धर्म
में
हराम
हो
दिन
गुज़रा
उसकी
याद
में
अब
शाम
तेरे
नाम
हो
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SHABAB ANWAR
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हो
गया
रुस्वा
वो
पहले
ही
इश्क़
में
सो
वफ़ा
भी
उसे
अब
जफ़ा
लगती
है
SHABAB ANWAR
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जो
कहा
मैंने
उसने
सुना
ही
नहीं
फ़ैसला
मेरे
हक़
में
हुआ
ही
नहीं
वैसे
तो
मिल
गई
सारी
चीज़ें
मुझे
जो
मगर
चाहिए
था
मिला
ही
नहीं
देख
कर
मुझको
उसने
छुपा
ली
नज़र
जैसे
उस
सेे
मिरा
राब्ता
ही
नहीं
उसने
दुनिया
लुटा
दी
मिरे
वास्ते
मैंने
उसके
लिए
कुछ
किया
ही
नहीं
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SHABAB ANWAR
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जो
भी
माँगे
वो
तुझे
हासिल
हो
शक
दु'आ
में
न
अगर
शामिल
हो
छोड़िए
ख़र्च
ज़ियादा
करना
जब
कमाना
ही
हमें
मुश्किल
हो
बिन
कहे
मेरे
वो
सब
कुछ
समझे
इतना
इक
यार
मिरा
क़ाबिल
हो
जब
हो
बेचैन
कभी
दिल
तेरा
रब
के
घर
में
भी
कभी
दाख़िल
हो
कर
दु'आ
अपने
ख़ुदास
अनवर
कुछ
तो
अच्छा
तिरा
मुस्तक़बिल
हो
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SHABAB ANWAR
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