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SHABAB ANWAR
jo bhi maange vo tujhe haasil ho
jo bhi maange vo tujhe haasil ho | जो भी माँगे वो तुझे हासिल हो
- SHABAB ANWAR
जो
भी
माँगे
वो
तुझे
हासिल
हो
शक
दु'आ
में
न
अगर
शामिल
हो
छोड़िए
ख़र्च
ज़ियादा
करना
जब
कमाना
ही
हमें
मुश्किल
हो
बिन
कहे
मेरे
वो
सब
कुछ
समझे
इतना
इक
यार
मिरा
क़ाबिल
हो
जब
हो
बेचैन
कभी
दिल
तेरा
रब
के
घर
में
भी
कभी
दाख़िल
हो
कर
दु'आ
अपने
ख़ुदास
अनवर
कुछ
तो
अच्छा
तिरा
मुस्तक़बिल
हो
- SHABAB ANWAR
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उस
की
बेचैनी
बढ़ाना
चाहती
हूँ
सुनिए
कह
कर
चुप
लगाना
चाहती
हूँ
Pooja Bhatia
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बड़ी
जल्दी
में
था
उस
दिन
ज़रा
बेचैन
भी
था
वो
उसे
कहना
था
कुछ
मुझ
सेे
मगर
वो
कह
नहीं
पाया
Varun Anand
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उसे
बेचैन
कर
जाऊँगा
मैं
भी
ख़मोशी
से
गुज़र
जाऊँगा
मैं
भी
Ameer Qazalbash
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अब
शहर
की
थकावट
बेचैन
कर
रही
है
अब
शाम
हो
गई
है
चल
माँ
से
बात
कर
लें
Akash Rajpoot
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कोई
मेरे
दिल
से
पूछे
तिरे
तीर-ए-नीम-कश
को
ये
ख़लिश
कहाँ
से
होती
जो
जिगर
के
पार
होता
Mirza Ghalib
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ये
ज़मीं
किस
क़दर
सजाई
गई
ज़िंदगी
की
तड़प
बढ़ाई
गई
आईने
से
बिगड़
के
बैठ
गए
जिन
की
सूरत
जिन्हें
दिखाई
गई
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Sahir Ludhianvi
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जिसने
बेचैनियाँ
दी
हैं
मुझे
बेचैन
रहे
मैंने
रो-रो
के
ख़ुदास
ये
दु'आ
माँगी
है
Shajar Abbas
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किसी
की
तपिश
में
ख़ुशी
है
किसी
की
किसी
की
ख़लिश
में
मज़ा
है
किसी
का
Unknown
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हर
एक
चौखट
खुली
हुई
थी
हर
इक
दरीचा
खुला
हुआ
था
कि
उसकी
आमद
पे
दर
यहाँ
तक
कि
बेघरों
का
खुला
हुआ
था
ये
तेरी
हम्म
ने
हमें
ही
उलझन
में
डाल
रक्खा
है
वरना
हम
पर
तमाम
साइंस
के
फ़लसफ़ों
का
हर
एक
चिट्ठा
खुला
हुआ
था
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Saad Ahmad
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ऐ
दिल
की
ख़लिश
चल
यूँँही
सही
चलता
तो
हूँ
उन
की
महफ़िल
में
उस
वक़्त
मुझे
चौंका
देना
जब
रंग
पे
महफ़िल
आ
जाए
Behzad Lakhnavi
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मुझको
कभी
अता
न
हो
जिस
इश्क़
में
वफ़ा
न
हो
हर
बात
तेरी
मानूँगा
बस
मुझ
सेे
तू
ख़फ़ा
न
हो
इक
ज़ख़्म
ऐसा
चाहिए
जिसकी
कोई
दवा
न
हो
इक
बार
मुझ
सेे
तुम
मिलो
और
फिर
कभी
जुदा
न
हो
बन
जाए
वो
फ़रिश्ता
ही
बंदा
अगर
बुरा
न
हो
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SHABAB ANWAR
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नसीब
अपना
किस
तरह
बनाएँ
हम
लकीरें
हाथ
की
किसे
दिखाएँ
हम
यही
तलब
है
हम
सेे
घर
के
लोगों
की
कहीं
से
रोज़
धन
कमा
के
लाएँ
हम
हमारे
बाप
ने
भी
कल
ये
कह
दिया
तुम्हारा
बोझ
कितना
और
उठाएँ
हम
जतन
इसी
के
वास्ते
है
कैसे
अब
गरीबी
के
चराग़
को
बुझाएँ
हम
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SHABAB ANWAR
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शाम
का
मंज़र
सुहाना
होता
है
तेरी
यादों
को
जो
आना
होता
है
करने
वाले
कर
गुज़रते
हैं
सभी
काहिलों
का
तो
बहाना
होता
है
ख़ामियाँ
फिर
कुछ
नज़र
आती
नहीं
कोई
बंदा
जब
दिवाना
होता
है
देख
ले
वो
मुस्कुरा
के
गर
कभी
दिल
में
ख़ुशियों
का
ठिकाना
होता
है
तेरा
अच्छा
वक़्त
है
तो
क्या
हुआ
दोस्त
'अनवर'
का
ज़माना
होता
है
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SHABAB ANWAR
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जिसके
होने
से
हो
सभी
ना-ख़ुश
मैं
वो
किरदार
हूँ
कहानी
में
SHABAB ANWAR
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हो
गया
रुस्वा
वो
पहले
ही
इश्क़
में
सो
वफ़ा
भी
उसे
अब
जफ़ा
लगती
है
SHABAB ANWAR
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