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Satyam Shukla
ik vafaadar 'aashiq bhi kya chahta hai
ik vafaadar 'aashiq bhi kya chahta hai | इक वफ़ादार 'आशिक़ भी क्या चाहता है
- Satyam Shukla
इक
वफ़ादार
'आशिक़
भी
क्या
चाहता
है
अपनी
हर
माशुका
से
वफ़ा
चाहता
है,
दिल-लगी
के
बिना
शा'इरी
का
हुनर
हो
बिन
सफ़र
में
गए
हादसा
चाहता
है
- Satyam Shukla
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रक़ीब
आकर
बताते
हैं
यहाँ
तिल
है
वहाँ
तिल
है
हमें
ये
जानकारी
थी
मियाँ
पहले
बहुत
पहले
Anand Raj Singh
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अगर
पलक
पे
है
मोती
तो
ये
नहीं
काफ़ी
हुनर
भी
चाहिए
अल्फ़ाज़
में
पिरोने
का
Javed Akhtar
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दर्द
सहने
का
हुनर
तो
पास
सबके
है
मगर
दर्द
कहने
का
हुनर
बस
शायरों
के
पास
है
Divy Kamaldhwaj
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रदीफ़ो-क़ाफ़िया-ओ-बह'र
का
भी
इल्म
है
लाज़िम
फ़क़त
दिल
टूट
जाने
से
कोई
शाइर
नहीं
बनता
Avtar Singh Jasser
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किताबें
बंद
करके
जब
मैं
बिस्तर
पर
पहुँचता
हूँ
तुम्हारी
याद
भी
आकर
बगल
में
लेट
जाती
है
Bhaskar Shukla
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हम
भी
दरिया
हैं
हमें
अपना
हुनर
मालूम
है
जिस
तरफ़
भी
चल
पड़ेंगे
रास्ता
हो
जाएगा
Bashir Badr
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लोग
हम
सेे
सीखते
हैं
ग़म
छुपाने
का
हुनर
आओ
तुमको
भी
सिखा
दें
मुस्कुराने
का
हुनर
क्या
ग़ज़ब
है
तजरबे
की
भेंट
तुम
ही
चढ़
गए
तुम
से
ही
सीखा
था
हमने
दिल
दुखाने
का
हुनर
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Kashif Sayyed
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लिक्खा
गया
न
कुछ
कभी
मुझ
सेे
जवाब
में
रक्खा
ही
रह
गया
है
तेरा
ख़त
किताब
में
Ankit Maurya
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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किताब-ए-इश्क़
में
हर
आह
एक
आयत
है
पर
आँसुओं
को
हुरूफ़-ए-मुक़त्तिआ'त
समझ
Umair Najmi
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सफ़र
में
हम
भला
किस
सेे
बिछड़ते
हमारे
साथ
में
कोई
नहीं
था
Satyam Shukla
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नई
मंज़िल
को
पाना
चाहते
हैं,
क़दम
फिर
लड़खड़ाना
चाहते
हैं
Satyam Shukla
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मुहब्बत
मर
तो
जाती
है
फ़क़त
इक
पल
में
ही
लेकिन,
बहुत
तकलीफ़
देती
है
हमें
ये
दफ़्न
होने
तक
Satyam Shukla
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मुझे
औरों
का
ग़म
भी
बाँटना
है
ख़ुदा
मेरे
दुखों
को
ख़त्म
कर
दे
Satyam Shukla
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गर
सज़ा
में
उम्र
भर
की
बा-मशक़्क़त
क़ैद
है
जुर्म
भी
फिर
इश्क़
सा
संगीन
होना
चाहिए
Satyam Shukla
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