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Sandeep kushwaha
husn lutaayega KHushboo kab tak hamne
husn lutaayega KHushboo kab tak hamne | हुस्न लुटाएगा ख़ुशबू कब तक हमने
- Sandeep kushwaha
हुस्न
लुटाएगा
ख़ुशबू
कब
तक
हमने
नदियों
को
भी
जंगल
होते
देखा
है
- Sandeep kushwaha
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एक
ही
नदी
के
हैं
ये
दो
किनारे
दोस्तो
दोस्ताना
ज़िंदगी
से
मौत
से
यारी
रखो
Rahat Indori
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तुझे
भूल
जाने
की
कोशिशें
कभी
कामयाब
न
हो
सकीं
तिरी
याद
शाख़-ए-गुलाब
है
जो
हवा
चली
तो
लचक
गई
Bashir Badr
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मुहब्बत
के
समुंदर
की
कलाकारी
ग़ज़ब
की
है
कि
सब
कुछ
डूब
जाता
है
मगर
तर
कुछ
नहीं
होता
Muntazir Firozabadi
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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गुलशन
से
कोई
फूल
मुयस्सर
न
जब
हुआ
तितली
ने
राखी
बाँध
दी
काँटे
की
नोक
पर
Unknown
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किसी
के
होठ
समुंदर
में
भी
तरसते
रहे
किसी
की
प्यास
को
सहरा
में
मिल
गया
पानी
Ajeetendra Aazi Tamaam
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तुमने
जो
फूल
लेते
में
छू
लीं
हैं
उंगलियाँ
मेरे
बदन
से
आएगी
ख़ुशबू
गुलाब
की
Siddharth Saaz
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बुरी
सरिश्त
न
बदली
जगह
बदलने
से
चमन
में
आ
के
भी
काँटा
गुलाब
हो
न
सका
Arzoo Lakhnavi
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हज़ारों
साल
नर्गिस
अपनी
बे-नूरी
पे
रोती
है
बड़ी
मुश्किल
से
होता
है
चमन
में
दीदा-वर
पैदा
Allama Iqbal
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हमेशा
हाथों
में
होते
हैं
फूल
उनके
लिए
किसी
को
भेज
के
मँगवाने
थोड़ी
होते
हैं
Anwar Shaoor
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कोई
बात
नहीं
कहने
वाले
लड़के
बातों
का
अंबार
छुपाए
रखते
हैं
Sandeep kushwaha
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रस्मन
कब
तक
हाथ
मिलाए
जाते
हम
दिल
मिलने
की
थोड़ी
तो
गुंजाइश
हो
Sandeep kushwaha
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शांत
दरिया
के
पास
बैठा
है
यानी
लड़का
उदास
बैठा
है
होश
दुनिया
को
बाँटता
था
जो
आज
ख़ुद
बद-हवा
से
बैठा
है
वो
जो
दिखता
नहीं
हमें
लेकिन
वो
कहीं
आस-पास
बैठा
है
तृप्त
दिखने
का
ढोंग
मत
करिए
दिल
अगर
ले
के
प्यास
बैठा
है
वो
मेरा
भी
तो
ख़ास
होता
था
जो
तेरा
बन
के
ख़ास
बैठा
है
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Sandeep kushwaha
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रिश्तों
में
अब
दूरी
रखना
जायज़
भी
है
ज़्यादा
ज़ूम
करे,
फ़ोटो
धुँदला
जाती
है
Sandeep kushwaha
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क़िस्से
सुना
रहा
हूँ
मैं
तुमको
शबाब
के
दिल
हो
गया
था
जब
क़रीं
इक
माहताब
के
वो
जो
शरीफ़
है
तो
है
दुनिया
के
सामने
अरमाँ
मचल
रहें
हैं
मगर
उस
गुलाब
के
ख़ुशबू
गुलों
की
और
कहीं
हो
रहीं
फ़ना
हक़दार
चूमता
रहा
पन्ने
किताब
के
कितनी
मशक़्क़तें
हैं
सितारों
से
पूछिए
रौशन
जो
हो
रहे
हैं
बिना
आफ़ताब
के
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Sandeep kushwaha
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