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Sandeep kushwaha
rishton men ab doori rakhna jaayaz bhi hai
rishton men ab doori rakhna jaayaz bhi hai | रिश्तों में अब दूरी रखना जायज़ भी है
- Sandeep kushwaha
रिश्तों
में
अब
दूरी
रखना
जायज़
भी
है
ज़्यादा
ज़ूम
करे,
फ़ोटो
धुँदला
जाती
है
- Sandeep kushwaha
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दुश्मनी
लाख
सही
ख़त्म
न
कीजे
रिश्ता
दिल
मिले
या
न
मिले
हाथ
मिलाते
रहिए
Nida Fazli
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कौन
सी
दीवार
है
मौजूद
इस
रिश्ते
में
'साज़'
क्यूँँ
नहीं
रो
सकते
हम
अपने
पिता
के
सामने
Siddharth Saaz
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पैसा
कमाने
आते
हैं
सब
राजनीति
में
आता
नहीं
है
कोई
भी
खोने
के
वास्ते
छम्मो
का
मुजरा
सुनते
हैं
नेता
जो
रात
भर
संसद
भवन
में
आते
हैं
सोने
के
वास्ते
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Paplu Lucknawi
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मिला
है
दुख
सदा
मुझको
मेरा
दुख
से
ये
नाता
है
मिरे
ख़ुद
घाव
में
मरहम
लगा
कर
दुख
सुलाता
है
Tiwari Jitendra
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शायद
आ
जाए
कभी
देखने
वो
रश्क-ए-मसीह
मैं
किसी
और
से
इस
वास्ते
अच्छा
न
हुआ
Anwar Taban
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फिर
उसके
बाद
कोई
सिलसिला
नहीं
रक्खा
जिसे
मुआ'फ़
किया,
राब्ता
नहीं
रक्खा
Renu Nayyar
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कोई
दुनिया
से
कटता
जा
रहा
है
किसी
के
घर
पे
रिश्ते
आ
रहे
हैं
Aarush Sarkaar
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जो
बच
गए
हैं
चराग़
उनको
बचाये
रक्खो
मैं
चाहता
हूँ
हवा
से
रिश्ता
बनाये
रक्खो
Azm Shakri
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उस
ख़ूब-रू
से
रब्त
ज़रा
कम
हुआ
मेरा
ये
देख
कर
उदासी
मेरे
संग
लग
गई
Siddharth Saaz
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प्यार
का
रिश्ता
ऐसा
रिश्ता
शबनम
भी
चिंगारी
भी
यानी
उन
सेे
रोज़
ही
झगड़ा
और
उन्हीं
से
यारी
भी
Ateeq Allahabadi
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वो
एक
वक़्त
था
उनको
गुमान
था
हम
पर
ये
एक
वक़्त
है
हम
सेे
नज़र
नहीं
मिलती
Sandeep kushwaha
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क़िस्से
सुना
रहा
हूँ
मैं
तुमको
शबाब
के
दिल
हो
गया
था
जब
क़रीं
इक
माहताब
के
वो
जो
शरीफ़
है
तो
है
दुनिया
के
सामने
अरमाँ
मचल
रहें
हैं
मगर
उस
गुलाब
के
ख़ुशबू
गुलों
की
और
कहीं
हो
रहीं
फ़ना
हक़दार
चूमता
रहा
पन्ने
किताब
के
कितनी
मशक़्क़तें
हैं
सितारों
से
पूछिए
रौशन
जो
हो
रहे
हैं
बिना
आफ़ताब
के
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Sandeep kushwaha
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जन
सेवा
के
मार्ग
हज़ारों
हैं
लेकिन
नेता
जी
को
मोक्ष
मिलेगा
संसद
में
Sandeep kushwaha
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वो
एक
काम
जो
सौंपा
गया
था
सूरज
को
मलाल
है
कि
इक
चराग़
कर
रहा
है
उसे
Sandeep kushwaha
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बिकने
को
तो
बिकती
है
खु़द्दारी
भी
बस
थोड़ा-सा
रेट
ज़ियादा
करती
है
Sandeep kushwaha
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