qisse suna raha hooñ main tumko shabaab ke | क़िस्से सुना रहा हूँ मैं तुमको शबाब के

  - Sandeep kushwaha
क़िस्सेसुनारहाहूँमैंतुमकोशबाबके
दिलहोगयाथाजबक़रींइकमाहताबके
वोजोशरीफ़हैतोहैदुनियाकेसामने
अरमाँमचलरहेंहैंमगरउसगुलाबके
ख़ुशबूगुलोंकीऔरकहींहोरहींफ़ना
हक़दारचूमतारहापन्ने‌किताबके
कितनीमशक़्क़तेंहैंसितारोंसेपूछिए
रौशनजोहोरहेहैंबिनाआफ़ताबके
  - Sandeep kushwaha
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy