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Sandeep kushwaha
shaant dariyaa ke paas baitha hai
shaant dariyaa ke paas baitha hai | शांत दरिया के पास बैठा है
- Sandeep kushwaha
शांत
दरिया
के
पास
बैठा
है
यानी
लड़का
उदास
बैठा
है
होश
दुनिया
को
बाँटता
था
जो
आज
ख़ुद
बद-हवा
से
बैठा
है
वो
जो
दिखता
नहीं
हमें
लेकिन
वो
कहीं
आस-पास
बैठा
है
तृप्त
दिखने
का
ढोंग
मत
करिए
दिल
अगर
ले
के
प्यास
बैठा
है
वो
मेरा
भी
तो
ख़ास
होता
था
जो
तेरा
बन
के
ख़ास
बैठा
है
- Sandeep kushwaha
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बीच
भँवर
से
कश्ती
कैसे
बच
निकली
बहुत
दिनों
तक
दरिया
भी
हैरान
रहा
Madan Mohan Danish
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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना
था
वो
ख़्वाब
में
भी
मिले
मैं
नींद
नींद
को
तरसा
मगर
नहीं
सोया
ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल
था
कि
थम
गई
बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म
है
कि
मैं
नहीं
रोया
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Khalil Ur Rehman Qamar
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हो
गई
है
पीर
पर्वत
सी
पिघलनी
चाहिए
इस
हिमालय
से
कोई
गंगा
निकलनी
चाहिए
Dushyant Kumar
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हम
को
मालूम
है
जन्नत
की
हक़ीक़त
लेकिन
दिल
के
ख़ुश
रखने
को
'ग़ालिब'
ये
ख़याल
अच्छा
है
Mirza Ghalib
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नए
साल
में
पिछली
नफ़रत
भुला
दें
चलो
अपनी
दुनिया
को
जन्नत
बना
दें
Unknown
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मिरे
माँ
बाप
जन्नत
से
नज़र
रखते
हैं
मुझ
पर
अब
मिरे
दिल
में
यतीमों
के
लिए
इक
ख़ास
कोना
है
Amaan Pathan
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हम
क्या
जानें
जन्नत
कैसी
होती
है
उस
सेे
पूछो
जिसने
तुमको
पाया
है
Harsh saxena
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पत्थर
दिल
के
आँसू
ऐसे
बहते
हैं
जैसे
इक
पर्वत
से
नदी
निकलती
है
Shobhit Dixit
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हमने
तुझ
पे
छोड़
दिया
है
कश्ती,
दरिया,
भँवर,
किनारा
Siddharth Saaz
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इक
और
दरिया
का
सामना
था
'मुनीर'
मुझ
को
मैं
एक
दरिया
के
पार
उतरा
तो
मैंने
देखा
Muneer Niyazi
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क़िस्से
सुना
रहा
हूँ
मैं
तुमको
शबाब
के
दिल
हो
गया
था
जब
क़रीं
इक
माहताब
के
वो
जो
शरीफ़
है
तो
है
दुनिया
के
सामने
अरमाँ
मचल
रहें
हैं
मगर
उस
गुलाब
के
ख़ुशबू
गुलों
की
और
कहीं
हो
रहीं
फ़ना
हक़दार
चूमता
रहा
पन्ने
किताब
के
कितनी
मशक़्क़तें
हैं
सितारों
से
पूछिए
रौशन
जो
हो
रहे
हैं
बिना
आफ़ताब
के
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Sandeep kushwaha
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हुस्न
लुटाएगा
ख़ुशबू
कब
तक
हमने
नदियों
को
भी
जंगल
होते
देखा
है
Sandeep kushwaha
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ये
तेरा
रंग
नया
है
तू
सँभलियो
प्यारे
रंग
उतरे
तो
ये
दीवार
बुरी
लगती
है
Sandeep kushwaha
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रिश्तों
में
अब
दूरी
रखना
जायज़
भी
है
ज़्यादा
ज़ूम
करे,
फ़ोटो
धुँदला
जाती
है
Sandeep kushwaha
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अपनी
नाकामी
से
भी
ख़ुश
होता
हूँ
नाकामी
के
क़िस्से
अच्छे
होते
हैं
Sandeep kushwaha
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