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Ravi 'VEER'
ab to khaabo men hi usse baat meri ho jaati hai
ab to khaabo men hi usse baat meri ho jaati hai | अब तो ख़्वाबों में ही उस सेे बात मेरी हो जाती है
- Ravi 'VEER'
अब
तो
ख़्वाबों
में
ही
उस
सेे
बात
मेरी
हो
जाती
है
काग़ज़
और
क़लम
होते
हैं
रात
मेरी
हो
जाती
है
ग़ज़लें
लिखते-लिखते
आँसू
काग़ज़
पर
गिरते
हैं
फिर
मतले
से
लेकर
मक्ते
तक
मात
मेरी
हो
जाती
है
- Ravi 'VEER'
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फेंक
कर
रात
को
दीवार
पे
मारे
होते
मेरे
हाथों
में
अगर
चाँद
सितारे
होते
Unknown
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कहाँ
है
तू
कि
तिरे
इंतिज़ार
में
ऐ
दोस्त
तमाम
रात
सुलगते
हैं
दिल
के
वीराने
Nasir Kazmi
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यार
सब
जम्अ'
हुए
रात
की
ख़ामोशी
में
कोई
रो
कर
तो
कोई
बाल
बना
कर
आया
Ahmad Mushtaq
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जैसे
देखा
हो
आख़िरी
सपना
रात
इतनी
उदास
थीं
आँखें
Siraj Faisal Khan
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कल
चौदहवीं
की
रात
थी
शब
भर
रहा
चर्चा
तिरा
कुछ
ने
कहा
ये
चाँद
है
कुछ
ने
कहा
चेहरा
तिरा
Ibn E Insha
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तेरे
बिन
घड़ियाँ
गिनी
हैं
रात
दिन
नौ
बरस
ग्यारह
महीने
सात
दिन
Rehman Faris
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तुम्हारा
ख़्वाब
भी
आए
तो
नींद
पूरी
हो
मैं
सो
तो
जाऊँगा
नींद
आने
की
दवा
लेकर
Swapnil Tiwari
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एक
ही
शख़्स
नहीं
होता
सदा
दिल
का
सुकूँ
एक
करवट
पे
कभी
नींद
नहीं
आ
सकती
Rehan Mirza
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भूला
नहीं
हूँ
आज
भी
हालात
गाँव
के
हाँ,
शहर
आ
गया
हूँ
मगर
साथ
गाँव
के
दुनिया
में
मेरा
नाम
जो
रोशन
हुआ
अगर
जलने
लगेंगे
बल्ब
भी
हर
रात
गाँव
के
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Tanoj Dadhich
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आज
की
रात
भी
गुज़री
है
मिरी
कल
की
तरह
हाथ
आए
न
सितारे
तिरे
आँचल
की
तरह
Ameer Qazalbash
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पर्दा
करना
पड़ता
है
शीशे
से
अब
जब
भी
देखो
ऐब
दिखाने
लगता
है
Ravi 'VEER'
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वक़्त
कितना
भी
बिता
कर
देख
लो
दोस्तों
से
मन
नहीं
भर
पाएगा
Ravi 'VEER'
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मुसलसल
गुज़र
जाएगा
ये
सफ़र
भी
सफ़र
में
अगर
जो
तिरा
साथ
हो
तो
Ravi 'VEER'
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कल
अचानक
वाक़िया
ये
हो
गया
मैं
तबस्सुम
देख
उसकी
खो
गया
उसकी
आँखें
नींद
मेरी
ले
गई
फिर
न
जाने
कब
सवेरा
हो
गया
वो
वहाँ
बिस्तर
में
सोई
थी
मगर
एक
पागल
सीढ़ियों
पर
सो
गया
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Ravi 'VEER'
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उसकी
बातें
उसकी
आँखें
उसकी
ज़ुल्फ़ें
क्या
कहने
उसकी
इक
सूरत
में
मुझको
जन्नत
सारी
लगती
है
Ravi 'VEER'
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