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Ravi 'VEER'
parda karna padta hai sheeshe se ab
parda karna padta hai sheeshe se ab | पर्दा करना पड़ता है शीशे से अब
- Ravi 'VEER'
पर्दा
करना
पड़ता
है
शीशे
से
अब
जब
भी
देखो
ऐब
दिखाने
लगता
है
- Ravi 'VEER'
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जो
उन
को
लिपटा
के
गाल
चूमा
हया
से
आने
लगा
पसीना
हुई
है
बोसों
की
गर्म
भट्टी
खिंचे
न
क्यूँँकर
शराब-ए-आरिज़
Ahmad Husain Mail
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है
देखने
वालों
को
सँभलने
का
इशारा
थोड़ी
सी
नक़ाब
आज
वो
सरकाए
हुए
हैं
Arsh Malsiyani
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लजा
कर
शर्म
खा
कर
मुस्कुरा
कर
दिया
बोसा
मगर
मुँह
को
बना
कर
Unknown
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हम
पे
एहसान
हैं
उदासी
के
मुस्कुराएँ
तो
शर्म
आती
है
Varun Anand
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इतनी
जल्दी
न
गिरा
अपने
हसीं
रुख़
पे
नक़ाब
तू
मुझे
ठीक
से
हैरान
तो
हो
लेने
दे
Rajesh Reddy
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अब
मज़ीद
उस
सेे
ये
रिश्ता
नहीं
रक्खा
जाता
जिस
सेे
इक
शख़्स
का
पर्दा
नहीं
रक्खा
जाता
पढ़ने
जाता
हूँ
तो
तस्में
नहीं
बाँधे
जाते
घर
पलटता
हूँ
तो
बस्ता
नहीं
रक्खा
जाता
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Tehzeeb Hafi
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यूँँ
बे-तरतीब
ज़ख़्मों
ने
बताया
राज़
क़ातिल
का
सलीके
से
जो
मेरा
क़त्ल
गर
होता
तो
क्या
होता
Vikram Gaur Vairagi
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वो
एक
राज़
जो
मुद्दत
से
राज़
था
ही
नहीं
उस
एक
राज़
से
पर्दा
उठा
दिया
गया
है
Aziz Nabeel
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किसी
के
झूठ
से
पर्दा
हटाकर
हमारा
सच
बहुत
रोया
था
उस
दिन
Shadab Asghar
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सोचकर
अब
शर्म
आती
है
ज़रा
चूम
लेना
होंठ
को
इज़हार
में
Neeraj Neer
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पल
भर
सजा
के
ज़िन्दगी
जिसने
उजाड़
दी
दुल्हन
की
तरह
आज
सजाया
गया
उसे
Ravi 'VEER'
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मुझे
जानते
हो
ये
भी
तो
बहुत
है
मिरे
दर्द
को
जानकर
क्या
मिलेगा?
Ravi 'VEER'
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ग़म
को
अश्कों
से
कब
तक
धोना
होगा
यार
मुझे
लगता
है
सब
खोना
होगा
कितने
धोखे
और
मुझे
खाने
होंगे
कितनी
बार
मुझे
फिर
से
रोना
होगा
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Ravi 'VEER'
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इक
बार
आँख
अपनी
देखों
उठा
के
जानाँ
मैं
हूँ
वहीं
अभी
भी
जिस
राह
पर
रुका
था
Ravi 'VEER'
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साढ़े
दस
पर
वो
अक्सर
सो
जाती
है
मैं
बस
चार
बजे
तक
जागा
रहता
हूँ
Ravi 'VEER'
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