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Pritam sihag
chahe jitna bhi khafa houun main tumse lekin
chahe jitna bhi khafa houun main tumse lekin | चाहे जितना भी ख़फ़ा होऊँ मैं तुम सेे लेकिन
- Pritam sihag
चाहे
जितना
भी
ख़फ़ा
होऊँ
मैं
तुम
सेे
लेकिन
मिट्टी
की
प्यास
पे
बादल
ये
बरस
जाता
है
- Pritam sihag
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निभेगी
किस
तरह
दिल
सोचता
है
अजब
लड़की
है
जब
देखो
ख़फ़ा
है
Fuzail Jafri
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मुझको
गया
था
छोड़
के
वो
कितने
तैश
में
लेकिन
ख़ुशी
से
रह
न
सका
एक
साल
भी
Ankit Maurya
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चेहरा
धुँदला
सा
था
और
सुनहरे
झुमके
थे
बादल
ने
कानों
में
चाँद
के
टुकड़े
पहने
थे
इक
दूजे
को
खोने
से
हम
इतना
डरते
थे
ग़ुस्सा
भी
होते
तो
बातें
करते
रहते
थे
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Vikram Gaur Vairagi
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मना
भी
लूँगा
गले
भी
लगाऊँगा
मैं
'अली'
अभी
तो
देख
रहा
हूँ
उसे
ख़फ़ा
कर
के
Ali Zaryoun
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देर
से
आने
पर
वो
ख़फ़ा
था
आख़िर
मान
गया
आज
मैं
अपने
बाप
से
मिलने
क़ब्रिस्तान
गया
Afzal Khan
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ख़फ़ा
हैं
फिर
भी
आ
कर
छेड़
जाते
हैं
तसव्वुर
में
हमारे
हाल
पर
कुछ
मेहरबानी
अब
भी
होती
है
Akhtar Shirani
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दो
दफ़ा
ग़ुस्सा
हुए
वो
एक
ग़लती
पर
मेरी
रात
की
रोटी
सवेरे
काम
में
लाई
गई
Tanoj Dadhich
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मैं
एक
किरदार
से
बड़ा
तंग
हूँ
क़लमकार
मुझे
कहानी
में
डाल
ग़ुस्सा
निकालना
है
Umair Najmi
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ये
जो
दुनिया
है
इसे
इतनी
इजाज़त
कब
है
हम
पे
अपनी
ही
किसी
बात
का
ग़ुस्सा
उतरा
Abhishek shukla
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जो
ग़ुस्सा
आ
गया
तो
क्या
ही
कर
लेंगे
ज़ुबाँ
ये
मेरी
गाली
भी
नहीं
देती
Irshad Siddique "Shibu"
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अनजान
सफ़र
में
मैं
तन्हा
नहीं
हूँ
यारों
घर
के
सभी
ज़िम्मों
को
जो
साथ
लिया
मैंने
Pritam sihag
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जानते
हो
तुम
सच्चे
इश्क़
की
रवानी
क्या
मरने
भर
से
पूरी
हो
जाती
है
कहानी
क्या
Pritam sihag
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ये
सोचा
था
ग़रीबी
को
किताबों
से
मिटाऊँगा
न
था
मालूम
मैं
भूखा
किताबें
ही
खा
जाऊँगा
मिरे
कंधों
पे
घर
का
बोझ
आता
जा
रहा
है
अब
मैं
अब
ख़्वाबों
को
बाहर
का
ही
रास्ता
तो
दिखाऊंँगा
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Pritam sihag
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अंतर
है
ये
रिश्ता
रखने
और
निभाने
में
हर
कोई
नहीं
जल
सकता
दीप
जलाने
में
Pritam sihag
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जानते
हो
तुम
सच्चे
इश्क़
की
रवानी
क्या
मरने
भर
से
पूरी
हो
जाती
है
कहानी
क्या
मेरी
इन
सफलताओं
से
उदास
हैं
वो
सब
उनको
ये
नहीं
दिखती
काँटों
की
निशानी
क्या
क्यूँँ
उदास
रहते
हो
साफ़
साफ़
कह
दो
ये
अबकी
बार
भी
वो
बातें
नहीं
निभानी
क्या
अपने
प्यारे
से
क्यूँँ
तुम
सारे
दिन
झगड़ते
हो
आपको
ये
कश्ती
तट
पर
नहीं
लगानी
क्या
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Pritam sihag
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