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Pritam sihag
are khudkushi karne waale zaraa ruk
are khudkushi karne waale zaraa ruk | अरे ख़ुद-कुशी करने वाले ज़रा रुक
- Pritam sihag
अरे
ख़ुद-कुशी
करने
वाले
ज़रा
रुक
वतन
पर
मरो
ऐसे
क्या
मर
रहे
हो
- Pritam sihag
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लहू
वतन
के
शहीदों
का
रंग
लाया
है
उछल
रहा
है
ज़माने
में
नाम-ए-आज़ादी
Firaq Gorakhpuri
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काम
आया
तिरंगा
कफ़न
के
लिए
कोई
क़ुर्बां
हुआ
था
वतन
के
लिए
सोचो
क्या
कर
लिया
तुमने
जी
कर
के
दोस्त
नस
भी
काटी
तो
बस
इक
बदन
के
लिए
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Neeraj Neer
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ये
सोचके
तो
दूसरी
कोई
मिट्टी
को
छु'आ
नहीं
के
बाद
मरने
के
हिन्दुस्तां
में
दफनाया
जाऊंगा
karan singh rajput
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पारा-ए-दिल
है
वतन
की
सर
ज़मीं
मुश्किल
ये
है
शहर
को
वीरान
या
इस
दिल
को
वीराना
कहें
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Majrooh Sultanpuri
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वतन
की
ख़ाक
ज़रा
एड़ियाँ
रगड़ने
दे
मुझे
यक़ीन
है
पानी
यहीं
से
निकलेगा
Unknown
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ग़ुर्बत
की
ठंडी
छाँव
में
याद
आई
उस
की
धूप
क़द्र-ए-वतन
हुई
हमें
तर्क-ए-वतन
के
बाद
Kaifi Azmi
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तिरंगा
दिल
में
है
लबों
पे
हिंदुस्तान
रखता
हूँ
सिपाही
हूँ
हथेली
पे
मैं
अपनी
जान
रखता
हूँ
Shashank Shekhar Pathak
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मैं
जब
मर
जाऊँ
तो
मेरी
अलग
पहचान
लिख
देना
लहू
से
मेरी
पेशानी
पे
हिंदुस्तान
लिख
देना
Rahat Indori
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लो
चाँद
हो
गया
नमू
माह-ए-ख़राम
का
ऐ
मोमिनों
लिबास-ए-सियाह
ज़ेब-ए-तन
करो
फ़र्श-ए-अज़ा
बिछा
के
अज़ाख़ाने
में
शजर
अब
सुब्ह-ओ-शाम
ज़िक्र-ए-ग़रीब-उल-वतन
करो
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Shajar Abbas
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हम
अपनी
जान
के
दुश्मन
को
अपनी
जान
कहते
हैं
मोहब्बत
की
इसी
मिट्टी
को
हिंदुस्तान
कहते
हैं
Rahat Indori
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अंतर
है
ये
रिश्ता
रखने
और
निभाने
में
हर
कोई
नहीं
जल
सकता
दीप
जलाने
में
Pritam sihag
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जानते
हो
तुम
सच्चे
इश्क़
की
रवानी
क्या
मरने
भर
से
पूरी
हो
जाती
है
कहानी
क्या
मेरी
इन
सफलताओं
से
उदास
हैं
वो
सब
उनको
ये
नहीं
दिखती
काँटों
की
निशानी
क्या
क्यूँँ
उदास
रहते
हो
साफ़
साफ़
कह
दो
ये
अबकी
बार
भी
वो
बातें
नहीं
निभानी
क्या
अपने
प्यारे
से
क्यूँँ
तुम
सारे
दिन
झगड़ते
हो
आपको
ये
कश्ती
तट
पर
नहीं
लगानी
क्या
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Pritam sihag
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उसने
इक
दिन
छोड़ने
की
बात
कह
दी
यानी
मेरे
दिल
की
बातें
जानती
थी
Pritam sihag
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बुरे
हालात
है
तो
क्या
हुआ
इंसान
अच्छा
हूँ
सभी
रहते
यहाँ
मुझ
सेे
खफ़ा
इंसान
अच्छा
हूँ
ये
मेरी
जेब
में
जब
तक
अमीरी
की
निशानी
थी
मुझे
सारा
ज़माना
कहता
था
,
इंसान
अच्छा
हूँ
मैं
तेरी
बे-वफ़ाई
के
सभी
क़िस्सों
से
वाक़िफ़
हूँ
मैंने
फिर
भी
रखी
तुम
सेे
वफ़ा
,इंसान
अच्छा
हूँ
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Pritam sihag
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किसी
पर
आया
नहीं
ये
दिल
हमारा
फूलों
का
शौक़ीन
है
क़ातिल
हमारा
अब
तो
इस
सागर
में
डूबेगी
ये
कश्ती
यार
पीछे
रह
गया
साहिल
हमारा
वो
जुदा
होने
का
कहकर
हट
गई
थी
क्या
बताऊँ
जीना
है
मुश्किल
हमारा
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Pritam sihag
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