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Prit
main sehra tha vo baarish thii
main sehra tha vo baarish thii | मैं सहरा था वो बारिश थी
- Prit
मैं
सहरा
था
वो
बारिश
थी
वो
बरसे
ऐसी
ख़्वाहिश
थी
वो
बरसी
फिर
सैलाब
आया
और
अब
बचने
की
गुंजाइश
थी
- Prit
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वो
अजब
शख़्स
था
हर
हाल
में
ख़ुश
रहता
था
उस
ने
ता-उम्र
किया
हँस
के
सफ़र
बारिश
में
Sahiba sheharyaar
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ख़्वाब
पलकों
की
हथेली
पे
चुने
रहते
हैं
कौन
जाने
वो
कभी
नींद
चुराने
आए
मुझ
पे
उतरे
मेरे
अल्हाम
की
बारिश
बन
कर
मुझ
को
इक
बूॅंद
समुंदर
में
छुपाने
आए
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Khalil Ur Rehman Qamar
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धूप
में
कौन
किसे
याद
किया
करता
है
पर
तिरे
शहर
में
बरसात
तो
होती
होगी
Ameer Imam
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उस
लड़की
से
बस
अब
इतना
रिश्ता
है
मिल
जाए
तो
बात
वगैरा
करती
है
बारिश
मेरे
रब
की
ऐसी
नेमत
है
रोने
में
आसानी
पैदा
करती
है
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Tehzeeb Hafi
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रात
हो,
चाँद
हो,
बारिश
भी
हो
और
तुम
भी
हो
ऐसा
मुमकिन
ही
नहीं
है
कि
कभी
हो
मिरे
साथ
Faiz Ahmad
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तुझे
करनी
है
तो
मुसावात
कर
कि
बेहतर
हमारे
भी
हालात
कर
मिटा
दिल
में
बनते
ये
सहराओं
को
ख़ुदा
अपने
बन्दों
पे
बरसात
कर
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Siddharth Saaz
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सर्द
झोंकों
से
भड़कते
हैं
बदन
में
शो'ले
जान
ले
लेगी
ये
बरसात
क़रीब
आ
जाओ
Sahir Ludhianvi
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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना
था
वो
ख़्वाब
में
भी
मिले
मैं
नींद
नींद
को
तरसा
मगर
नहीं
सोया
ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल
था
कि
थम
गई
बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म
है
कि
मैं
नहीं
रोया
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Khalil Ur Rehman Qamar
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अगर
तुम
हो
तो
घबराने
की
कोई
बात
थोड़ी
है
ज़रा
सी
बूँदा-बाँदी
है
बहुत
बरसात
थोड़ी
है
ये
राह-ए-इश्क़
है
इस
में
क़दम
ऐसे
ही
उठते
हैं
मोहब्बत
सोचने
वालों
के
बस
की
बात
थोड़ी
है
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Abrar Kashif
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आँख
भर
आई
किसी
से
जो
मुलाक़ात
हुई
ख़ुश्क
मौसम
था
मगर
टूट
के
बरसात
हुई
Manzar Bhopali
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बे-वफ़ा
शख़्स
को
बावफ़ा
माना
था
मैंने
पत्थर
को
अपना
ख़ुदा
माना
था
Prit
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सोगवारी
है,
हिज्र
तारी
है
अश्क
बारी
है,
हिज्र
तारी
है
दिल
ए
दरिया
पे
दर्द
ए
सहरा
की
रेगज़ारी
है,
हिज्र
तारी
है
वस्ल
का
एक
दिन
है
उस
पर
भी
हिज्र
तारी
है
हिज्र
तारी
है
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Prit
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मुझे
लगता
नहीं
कोई
ख़ुदा
होगा
अगर
होगा
तो
वो
भी
बे-वफ़ा
होगा
तुझे
मुझ
सेे
चुरा
कर
ले
गया
है
जो
मेरी
उतरन
पहन
के
ख़ुश
हुआ
होगा
उसे
मेरी
महक
तो
आती
ही
होगी
वो
जब
तेरे
बदन
को
चूमता
होगा
उसे
तू
मिल
गया,
तक़दीर
है
उसकी
बुरा
होगा
मेरा,
उसका
भला
होगा
वो
तेरी
माँग
में
सिंदूर
भर
देगा
मेरे
घर
मौत,
तेरे
घर
मज़ा
होगा
वो
पत्थर
दिल
से
बू-ए-इश्क़
आती
है
वो
सहरा
भी
कभी
दरिया
रहा
होगा
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Prit
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मेरे
इश्क़
को
लम्स
समझने
वाली
उसके
लम्स
को
इश्क़
समझ
बैठी
है
Prit
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मैं
ही
सिंदूर
भरता
माँग
में
तेरी
मेरी
जाँ
गर
मैं
तेरी
जात
का
होता
Prit
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