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Prit
sogwaari hai hijr taari hai
sogwaari hai hijr taari hai | सोगवारी है, हिज्र तारी है
- Prit
सोगवारी
है,
हिज्र
तारी
है
अश्क
बारी
है,
हिज्र
तारी
है
दिल
ए
दरिया
पे
दर्द
ए
सहरा
की
रेगज़ारी
है,
हिज्र
तारी
है
वस्ल
का
एक
दिन
है
उस
पर
भी
हिज्र
तारी
है
हिज्र
तारी
है
- Prit
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अब
तो
दरिया
सूख
चुका
है
अब
तो
इस
शम्मा
को
बुझा
दो
Siddharth Saaz
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दूर
से
ही
बस
दरिया
दरिया
लगता
है
डूब
के
देखो
कितना
प्यासा
लगता
है
Waseem Barelvi
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इक
मुहब्बत
से
भरी
उस
ज़िंदगी
के
ख़्वाब
हैं
पेड़
दरिया
और
पंछी
तेरे
मेरे
ख़्वाब
हैं
Neeraj Nainkwal
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क्या
दुख
है
समुंदर
को
बता
भी
नहीं
सकता
आँसू
की
तरह
आँख
तक
आ
भी
नहीं
सकता
तू
छोड़
रहा
है
तो
ख़ता
इस
में
तेरी
क्या
हर
शख़्स
मेरा
साथ
निभा
भी
नहीं
सकता
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Waseem Barelvi
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उतरी
हुई
नदी
को
समुंदर
कहेगा
कौन
सत्तर
अगर
हैं
आप
बहत्तर
कहेगा
कौन
पपलू
से
उनकी
बीवी
ने
कल
रात
कह
दिया
मैं
देखती
हूँ
आपको
शौहर
कहेगा
कौन
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Paplu Lucknawi
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हर
घड़ी
ख़ुद
से
उलझना
है
मुक़द्दर
मेरा
मैं
ही
कश्ती
हूँ
मुझी
में
है
समुंदर
मेरा
Nida Fazli
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सभी
को
ग़म
है
समुंदर
के
ख़ुश्क
होने
का
कि
खेल
ख़त्म
हुआ
कश्तियाँ
डुबोने
का
Shahryar
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तिरे
एहसास
में
डूबा
हुआ
मैं
कभी
सहरा
कभी
दरिया
हुआ
मैं
Siraj Faisal Khan
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कोई
समुन्दर,
कोई
नदी
होती,
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता?
Tehzeeb Hafi
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वो
इतना
शांत
दरिया
था
मगर
जब
गया
तो
ले
गया
सब
कुछ
बहा
के
Siddharth Saaz
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आज
करता
हूँ
बात
फूलों
की
बात
में
है
सिफ़ात
फूलों
की
उसके
चेहरे
पे
रंग
फूलों
का
उसके
होंठों
पे
बात
फूलों
की
पैरहन
उसका
साफ़
पानी
है
उसका
पर्दा
क़नात
फूलों
की
जब
कभी
उसका
ज़िक्र
हो
आया
छेड़
दी
हमने
बात
फूलों
की
मेरी
आँखों
में
ख़्वाब
फूलों
का
उसके
बिस्तर
पे
रात
फूलों
की
किसने
जाना
है
दर्द
फूलों
का
कौन
समझा
है
बात
फूलों
की
उन
पे
लिखनी
थी
इक
ग़ज़ल
हमको
हमने
लिख
दी
सिफ़ात
फूलों
की
कभी
ब्याही
थी
बेटियाँ
हमने
कभी
की
थी
ज़कात
फूलों
की
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Prit
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कोई
पलटे
भी
इसको
तो
कैसे
दर्द
का
उल्टा
भी
तो
दर्द
ही
है
Prit
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वस्ल
का
एक
दिन
है
उस
पर
भी
हिज्र
तारी
है
हिज्र
तारी
है
Prit
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मेरी
क़िस्मत
के
क्या
कहने,
बदन
से
नाग
लिपटा
है
ये
काला
नाग
ज़हरीला
सा,
इसको
इश्क़
कहते
हैं
Prit
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उसके
बिन
तेरा
दिल
नहीं
लगता?
चल
तो
फिर
एक
काम
कर,
मर
जा
Prit
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