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Prit
main hi sindoor bharta maang men teri
main hi sindoor bharta maang men teri | मैं ही सिंदूर भरता माँग में तेरी
- Prit
मैं
ही
सिंदूर
भरता
माँग
में
तेरी
मेरी
जाँ
गर
मैं
तेरी
जात
का
होता
- Prit
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वही
शागिर्द
फिर
हो
जाते
हैं
उस्ताद
ऐ
'जौहर'
जो
अपने
जान-ओ-दिल
से
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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राहों
में
जान
घर
में
चराग़ों
से
शान
है
दीपावली
से
आज
ज़मीन
आसमान
है
Obaid Azam Azmi
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पहले
लगा
था
हिज्र
में
जाएँगे
जान
से
पर
जी
रहे
हैं
और
भी
हम
इत्मीनान
से
Ankit Maurya
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चाहे
हो
आसमान
पे
चाहे
ज़मीं
पे
हो
वहशत
का
रक़्स
हम
ही
करेंगे
कहीं
पे
हो
दिल
पर
तुम्हारे
नाम
की
तख़्ती
लगी
न
थी
फिर
भी
ज़माना
जान
गया
तुम
यहीं
पे
हो
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Nirmal Nadeem
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इसी
से
जान
गया
मैं
कि
बख़्त
ढलने
लगे
मैं
थक
के
छाँव
में
बैठा
तो
पेड़
चलने
लगे
मैं
दे
रहा
था
सहारे
तो
इक
हुजूम
में
था
जो
गिर
पड़ा
तो
सभी
रास्ता
बदलने
लगे
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Farhat Abbas Shah
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इश्क़
माशूक़
इश्क़
'आशिक़
है
यानी
अपना
ही
मुब्तला
है
इश्क़
Meer Taqi Meer
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एक
नया
'आशिक़
है
उसका,
जान
छिड़कता
है
उसपर
मुझको
डर
है
वो
भी
इक
दिन
मय-ख़ाने
से
निकलेगा
Siddharth Saaz
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ये
नहीं
है
कि
वो
एहसान
बहुत
करता
है
अपने
एहसान
का
एलान
बहुत
करता
है
आप
इस
बात
को
सच
ही
न
समझ
लीजिएगा
वो
मेरी
जान
मेरी
जान
बहुत
करता
है
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Jawwad Sheikh
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तेरा
पीछा
करते
करते
जाने
क्यूँ
मैं
दुनियादारी
से
पीछे
छूट
गया
तूने
तो
ऐ
जान
महज़
दिल
तोड़ा
था
तू
क्या
जाने
मैं
अंदर
तक
टूट
गया
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Ritesh Rajwada
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गर
उदासी,
चिड़चिड़ापन,
जान
देना
प्यार
है
माफ़
करना,
काम
मुझको
और
भी
हैं
दोस्तो
Divy Kamaldhwaj
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उसे
हर
वक़्त
करता
हूँ
महसूस
वो
जिसे
आज
तक
छुआ
ही
नहीं
Prit
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कुछ
तो
है
जो
ख़ास
है,
कुछ
है
जो
इक
एहसास
है
कुछ
हमारे
दर्मियाँ
ख़ामोश
से
अल्फ़ाज़
हैं
Prit
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तल्ख़
मौसम
में
मीठी
बातें
कर
चाय
में
जैसे
चीनी
बातें
कर
टूटने
को
है
सच्चा
इश्क़
अपना
जोड़े
रखने
को
झूठी
बातें
कर
आज
कल
मन
उदास
रहता
है
थोड़े
दिन
तक
हवस
की
बातें
कर
मुझको
दुनिया
से
कोई
मतलब
नइँ
मेरे
महबूब
ख़ुद
की
बातें
कर
गुफ़्तुगू
अपनी
सुनने
वालों
को
शर्म
आ
जाए
वैसी
बातें
कर
ग़ज़लें
लिख
कर
रिझाना
है
तुझको
रूठ
जा
मुझ
सेे
कड़वी
बातें
कर
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Prit
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मैं
साथ
हूँ
जिसके
उसको
कोई
भी
फ़र्क
पड़ता
नहीं
है
मुझ
सेे
उधर
कोई
है
जो
मेरी
बस
इक
झलक
की
ख़ातिर
तड़पता
है
'प्रीत'
Prit
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टूटने
को
है
सच्चा
इश्क़
अपना
जोड़े
रखने
को
झूठी
बातें
कर
Prit
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