hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Prashant Sitapuri
tere chehre pe hare ja rahe hain
tere chehre pe hare ja rahe hain | तेरे चेहरे पे हारे जा रहे हैं
- Prashant Sitapuri
तेरे
चेहरे
पे
हारे
जा
रहे
हैं
सब
आँखों
के
इशारे
जा
रहे
हैं
कभी
ये
चैन
से
कटते
थे
यारों
मगर
अब
दिन
गुज़ारे
जा
रहे
हैं
मुहब्बत
से
सभी
हैं
दूर,
यानी
नये
लड़के
सुधारे
जा
रहे
हैं
उतारूंगा
समुंदर
में
भी
कश्ती
अभी
तो
बस
किनारे
जा
रहे
हैं
अदब
रख,
बंदगी
कर,
सर
झुका,
आज
बड़े
बूढ़े
हमारे
जा
रहे
हैं
- Prashant Sitapuri
Download Ghazal Image
कोई
तितली
पकड़
लें
अगर
फूल
पर
रख
दिया
कीजिए
Vikas Rana
Send
Download Image
29 Likes
चल
दिए
घर
से
तो
घर
नहीं
देखा
करते
जाने
वाले
कभी
मुड़
कर
नहीं
देखा
करते
सीपियां
कौन
किनारे
से
उठा
कर
भागा
ऐसी
बाते
समुंदर
नहीं
देखा
करते
Read Full
Unknown
Send
Download Image
23 Likes
एक
ही
नदी
के
हैं
ये
दो
किनारे
दोस्तो
दोस्ताना
ज़िंदगी
से
मौत
से
यारी
रखो
Rahat Indori
Send
Download Image
50 Likes
किसी
कली
किसी
गुल
में
किसी
चमन
में
नहीं
वो
रंग
है
ही
नहीं
जो
तिरे
बदन
में
नहीं
Farhat Ehsaas
Send
Download Image
59 Likes
गुलशन
से
कोई
फूल
मुयस्सर
न
जब
हुआ
तितली
ने
राखी
बाँध
दी
काँटे
की
नोक
पर
Unknown
Send
Download Image
41 Likes
हमेशा
हाथों
में
होते
हैं
फूल
उनके
लिए
किसी
को
भेज
के
मँगवाने
थोड़ी
होते
हैं
Anwar Shaoor
Send
Download Image
29 Likes
वक़्त
किस
तेज़ी
से
गुज़रा
रोज़-मर्रा
में
'मुनीर'
आज
कल
होता
गया
और
दिन
हवा
होते
गए
Muneer Niyazi
Send
Download Image
21 Likes
बुरी
सरिश्त
न
बदली
जगह
बदलने
से
चमन
में
आ
के
भी
काँटा
गुलाब
हो
न
सका
Arzoo Lakhnavi
Send
Download Image
32 Likes
देख
ज़िंदाँ
से
परे
रंग-ए-चमन
जोश-ए-बहार
रक़्स
करना
है
तो
फिर
पाँव
की
ज़ंजीर
न
देख
Majrooh Sultanpuri
Send
Download Image
22 Likes
ये
जिस्म
तंग
है
सीने
में
भी
लहू
कम
है
दिल
अब
वो
फूल
है
जिस
में
कि
रंग-ओ-बू
कम
है
Pallav Mishra
Send
Download Image
23 Likes
Read More
क्या
करेंगे
ख़ैर
मेरी
,
ख़ैर
मेरी
छोड़िये
आप
मुझको
ये
बतायें
आपका
क्या
हाल
है
Prashant Sitapuri
Send
Download Image
1 Like
कौन
जाने
किस
तरह
से
हादसा
ये
हो
गया
ख़ूब
रोका
दिल
को
फिर
भी
प्यार
तुझ
सेे
हो
गया
Prashant Sitapuri
Send
Download Image
0 Likes
उठते
हैं
बुलबुले
जो
सभी
इंतिशार
के
रह-रह
के
याद
किस्से
दिलाते
हैं
हार
के
मुझको
यक़ीन
उसपे
ज़्यादा
है
इसलिए
देखे
हैं
मैंने
मोजिज़े
परवरदिगार
के
Read Full
Prashant Sitapuri
Send
Download Image
1 Like
ग़मज़दा
इस
ज़िन्दगी
को
देखते
हैं
और
फिर
अपनी
घड़ी
को
देखते
हैं
ये
ख़ुशी
भी
जाँ
कि
मर
के
चैन
से
हम
जी
रहे
हर
आदमी
को
देखते
हैं
Read Full
Prashant Sitapuri
Send
Download Image
1 Like
पहला
सितम
शफ़ा
की
दवा
एक
शख़्स
था
दूजा
सितम
है
ये
कि
दवा
कुछ
न
कर
सकी
Prashant Sitapuri
Send
Download Image
0 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Parinda Shayari
Aag Shayari
Revenge Shayari
Life Shayari
Mehboob Shayari