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Prashant Sitapuri
uthte hain bulbule jo sabhi intishaar ke
uthte hain bulbule jo sabhi intishaar ke | उठते हैं बुलबुले जो सभी इंतिशार के
- Prashant Sitapuri
उठते
हैं
बुलबुले
जो
सभी
इंतिशार
के
रह-रह
के
याद
किस्से
दिलाते
हैं
हार
के
मुझको
यक़ीन
उसपे
ज़्यादा
है
इसलिए
देखे
हैं
मैंने
मोजिज़े
परवरदिगार
के
- Prashant Sitapuri
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अपनी
तन्हाई
मिरे
नाम
पे
आबाद
करे
कौन
होगा
जो
मुझे
उस
की
तरह
याद
करे
Parveen Shakir
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गली
में
बैठे
हैं
उसकी
नज़र
जमाए
हुए
हमारे
बस
में
फ़क़त
इंतिज़ार
करना
है
Swapnil Tiwari
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अब
तो
उन
की
याद
भी
आती
नहीं
कितनी
तन्हा
हो
गईं
तन्हाइयाँ
Firaq Gorakhpuri
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दिलों
को
तेरे
तबस्सुम
की
याद
यूँँ
आई
कि
जगमगा
उठें
जिस
तरह
मंदिरों
में
चराग़
Firaq Gorakhpuri
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इस
रास्ते
में
जब
कोई
साया
न
पाएगा
ये
आख़िरी
दरख़्त
बहुत
याद
आएगा
Azhar Inayati
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जहाँ
पंखा
चल
रहा
है
वहीं
रस्सी
भी
पड़ी
है
मुझे
फिर
ख़याल
आया,
अभी
ज़िन्दगी
पड़ी
है
Zubair Ali Tabish
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जिस
रात
ख़ुद-कुशी
के
मुझे
आए
थे
ख़याल
उस
रात
मैंने
शे'र
कहे
और
सो
गया
Tanoj Dadhich
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बारे
दुनिया
में
रहो
ग़म-ज़दा
या
शाद
रहो
ऐसा
कुछ
कर
के
चलो
याँ
कि
बहुत
याद
रहो
Meer Taqi Meer
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तेरे
यादों
की
छोटी
खिड़कियों
से
तुझे
हर
रोज़
जी
भर
देखता
हूँ
Umesh Maurya
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तुम
से
छुट
कर
भी
तुम्हें
भूलना
आसान
न
था
तुम
को
ही
याद
किया
तुम
को
भुलाने
के
लिए
Nida Fazli
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तेरी
महफिल
से
जैसे
चल
दिए
हम
लगा
यूँँ
अपने
रस्ते
चल
दिए
हम
गिनाने
लग
गए
सब
खूबियां
तो
उठे
हम
और
उठ
के
चल
दिए
हम
अभी
इजहार
की
हिम्मत
नहीं
है
सो
आँखों
के
इशारे
चल
दिए
हम
तू
सारे
दांव
उल्फत
के
चला
था
तेरे
हिस्से
में
धोखे
चल
दिए
हम
रहा
कुछ
साथ
किस्मत
का
मेरे
में
बचे
कुछ
दांव
अच्छे
चल
दिए
हम
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Prashant Sitapuri
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पहला
सितम
शफ़ा
की
दवा
एक
शख़्स
था
दूजा
सितम
है
ये
कि
दवा
कुछ
न
कर
सकी
Prashant Sitapuri
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ता'उम्र
जिनके
वास्ते
उलफ़त
बनायी
है
वो
लोग
मेरे
हिस्से
में
धोखा
बना
रहे
Prashant Sitapuri
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सब
एक
खता
पर
मुझको
कहने
लगे
क्या
क्या
मैंने
तो
ये
समझा
था
सब
मुझको
समझते
हैं
Prashant Sitapuri
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आँसू
पीकर
अब
रोज़
गुजरते
हैं
तेरी
यादों
से
खर्चा
चलता
है
Prashant Sitapuri
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