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Amanpreet singh
mujhe kehna nahin tha par meri maano
mujhe kehna nahin tha par meri maano | मुझे कहना नहीं था पर मेरी मानो
- Amanpreet singh
मुझे
कहना
नहीं
था
पर
मेरी
मानो
गले
लग
कर
उसे
तो
अब
भुला
लो
तुम
- Amanpreet singh
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ख़ूब-सूरत
ये
मोहब्बत
में
सज़ा
दी
उसने
फिर
गले
मिलके
मेरी
उम्र
बढ़ा
दी
उसने
Manzar Bhopali
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दफ़्तर
तक
जाकर
के
वापस
लौटा
हूँ
गले
लगाना
भूल
गया
था
तुमको
मैं
Tanoj Dadhich
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हर
मुलाक़ात
पे
सीने
से
लगाने
वाले
कितने
प्यारे
हैं
मुझे
छोड़
के
जाने
वाले
ज़िंदगी
भर
की
मोहब्बत
का
सिला
ले
डूबे
कैसे
नादाँ
थे
तिरे
जान
से
जाने
वाले
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Vipul Kumar
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कोई
समुंदर,
कोई
नदी
होती
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता
ताने
देने
से
और
हम
पे
शक
करने
से
बेहतर
था
गले
लगा
के
तुमने
हिजरत
का
दुख
बाट
लिया
होता
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Tehzeeb Hafi
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ये
कब
कहते
हैं
कि
आकर
हमको
गले
लगा
ले
वो
मिल
जाए
तो
रस्मन
ही
बस
हाथ
मिला
ले
काफ़ी
है
इतने
कहाँ
नसीब
कि
इस
सेे
प्यास
बुझाएँ
खेल
करें
दरिया
हम
जैसों
को
अपने
पास
बिठा
ले
काफ़ी
है
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Vashu Pandey
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बिछड़कर
उसका
दिल
लग
भी
गया
तो
क्या
लगेगा
वो
थक
जाएगा
और
मेरे
गले
से
आ
लगेगा
मैं
मुश्किल
में
तुम्हारे
काम
आऊँ
या
ना
आऊँ
मुझे
आवाज़
दे
लेना
तुम्हें
अच्छा
लगेगा
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Tehzeeb Hafi
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उसने
गले
से
हमको
लगाया
तो
रो
पड़े
अपना
बना
के
हाथ
छुड़ाया
तो
रो
पड़े
मैंने
ग़मों
से
कह
तो
दिया
रहना
उम्र
भर
वा'दा
ग़मों
ने
अपना
निभाया
तो
रो
पड़े
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Vikas Sahaj
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रो
सकूँ
मैं
लगा
के
सीने
से
ऐसा
कोई
तो
यार
महरम
हो
Amaan Pathan
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मिल
के
होती
थी
कभी
ईद
भी
दीवाली
भी
अब
ये
हालत
है
कि
डर
डर
के
गले
मिलते
हैं
Unknown
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वो
अक़्ल-मंद
कभी
जोश
में
नहीं
आता
गले
तो
लगता
है
आग़ोश
में
नहीं
आता
Farhat Ehsaas
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तेरे
बिन
दिन
गुज़ार
सकता
हूॅं
ज़िंदगी
तुझपे
वार
सकता
हूॅं
जीतने
के
लिए
यहाँ
पर
मैं
तीर
अपनों
के
मार
सकता
हूॅं
ख़ास
तेरे
हैं
इसलिए
चुप
हूॅं
वरना
सर
से
उतार
सकता
हूॅं
पेड़
पर
छुप
के
मुझको
कहते
हैं
कर
तो
मैं
भी
शिकार
सकता
हूॅं
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Amanpreet singh
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वो
बदन
कभी
मेरा
तो
हुआ
नहीं
लेकिन
उस
बदन
कि
ख़ुशबू
से
राबता
रहा
काफ़ी
Amanpreet singh
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असर
फिर
इश्क़
का
होने
लगा
है
मोहब्बत
में
ये
दिल
रोने
लगा
है
तेरी
बातें
बुरी
क्यूँ
लग
रही
है
दिखे
दिल
खुद
सेे
अब
खोने
लगा
है
लड़ाई
तो
किसी
के
ज़िक्र
की
थी
उसी
का
ज़िक्र
फिर
होने
लगा
है
तुम्हें
नफ़रत
सी
मुझ
सेे
हो
रही
है
मुझे
महसूस
ये
होने
लगा
है
बिना
मेरे
भी
जी
सकते
हो
हाँ
तुम
ये
सुन
दिल
मेरा
इक
कोने
लगा
है
बड़ी
मुश्किल
ये
दिल
से
बात
निकली
किसी
का
फिर
से
वो
होने
लगा
है
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Amanpreet singh
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रख
ली
तुम
सेे
भी
दोस्ती
मैंने
और
फिर
कर
ली
शा'इरी
मैंने
उसकी
बातें
करो
सभी
मुझ
सेे
देखनी
फिर
है
बे-ख़ुदी
मैंने
वो
मोहब्बत
से
बाज़
आए
तो
उसको
करना
है
अजनबी
मैंने
उसकी
बातें
बता
दी
है
तुमको
तुम
सेे
भी
कर
ली
दुश्मनी
मैंने
आपसे
बात
कर
के
लगता
है
आपकी
जी
है
ज़िंदगी
मैंने
वो
अँधेरे
से
डरती
रहती
थी
घर
जला
कर
दी
रौशनी
मैंने
जब
तेरे
साथ
दिल
नहीं
लगता
फिर
तो
करनी
है
ख़ुद-कुशी
मैंने
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Amanpreet singh
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वो
पहाड़ों
से
यूँँ
नीचे
देखता
है
जैसे
अब
भी
बाबा
नीचे
बैठे
होंगे
Amanpreet singh
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