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Pankaj murenvi
mita muhabbat se doon dar ko uske jo
mita muhabbat se doon dar ko uske jo | मिटा मुहब्बत से दूँ डर को उसके जो
- Pankaj murenvi
मिटा
मुहब्बत
से
दूँ
डर
को
उसके
जो
मुझे
पता
लग
जाए
गर
उसके
डर
का
उसके
ख़त
का
जवाब
लिखना
है
मुझको
नया
पता
मिल
जाए
गर
उसके
घर
का
- Pankaj murenvi
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तेरे
वादों
को
फिर
से
पढ़
रहा
हूँ
तेरे
ख़त
पानी
पानी
हो
रहे
हैं
Harman Dinesh
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शराफ़त
ने
मुझको
कहीं
का
न
छोड़ा
रक़ीब
अपने
ख़त
मुझ
सेे
लिखवा
रहे
हैं
Rajesh Reddy
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मैं
ने
उस
की
तरफ़
से
ख़त
लिक्खा
और
अपने
पते
पे
भेज
दिया
Fahmi Badayuni
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कोई
ख़त-वत
नहीं
फाड़ा
कोई
तोहफ़ा
नहीं
तोड़ा
कि
वो
देखे
तो
ख़ुद
सोचे
कि
दिल
तोड़ा,
नहीं
तोड़ा?
Charagh Sharma
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तेरे
ख़त
आज
लतीफ़ों
की
तरह
लगते
हैं
ख़ूब
हँसता
हूँ
जहाँ
लफ़्ज-ए-वफ़ा
आता
है
Zubair Ali Tabish
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ये
तेरे
ख़त
ये
तेरी
ख़ुशबू
ये
तेरे
ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ
हैं
तेरे
कौल
और
क़सम
की
तरह
गुज़िश्ता
साल
मैंने
इन्हें
गिनकर
रक्खा
था
किसी
ग़रीब
की
जोड़ी
हुई
रक़म
की
तरह
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Jaun Elia
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जो
उसने
लिक्खे
थे
ख़त
कापियों
में
छोड़
आए
हम
आज
उसको
बड़ी
उलझनों
में
छोड़
आए
Munawwar Rana
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उसने
ख़त
का
जवाब
भेजा
है
चार
लेकिन
हैं
एक
हाँ
के
साथ
Fahmi Badayuni
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ऐसा
न
हो
कि
प्यार
का
मज़मून
भाँप
कर
ख़त
खोलिए
तो
उस
में
उदासी
के
अक्स
हों
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Gaurav Singh
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हम
कुछ
ऐसे
उसके
आगे
अपनी
वफ़ा
रख
देते
हैं
बच्चे
जैसे
रेल
की
पटरी
पर
सिक्का
रख
देते
हैं
तस्वीर-ए-ग़म,
दिल
के
आँसू,
रंजो-नदामत,
तन्हाई
उसको
ख़त
लिखते
हैं
ख़त
में
हम
क्या
क्या
रख
देते
हैं
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Subhan Asad
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मुझको
होती
है
हर
रोज़
मुहब्बत
नई
नई
से
ये
ख़ामी
है
मुझ
में
या
ख़ूबी
है
मेरी
कोई
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Pankaj murenvi
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पाल
रखा
है
इन
आँखों
ने
भी
एक
ख़्वाब
तुम
से
मिले
हमें
भी
इस
वेलेंटाइन
डे
गुलाब
तुम
से
Pankaj murenvi
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ज़ख़्म
तिरे
हैं
जो
सब
पाले
हुए
रखे
हैं
मैंने
वो
कुछ
ख़त
अब
तक
भी
सँभाले
हुए
रखे
हैं
मैंने
Pankaj murenvi
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तेरे
शहरस
मेरा
भी
नाता
है
कोई
मुझ
सेा
यूँँ
ही
नहीं
यहाँ
आता
है
कोई
तेरे
बाद
मैं
गायब
सा
हूँ
इक
मुझ
में
ही
मुझको
तेरे
सिवा
कहाँ
भाता
है
कोई
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Pankaj murenvi
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ए
दिल
के
चारा-गर
तिरी
मुहब्बत
के
बीमार
हमें
लगते
हैं
तेरे
बिन
ये
बस्ती
ये
पेड़
फूल
सब
बेकार
हमें
लगते
हैं
Pankaj murenvi
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