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Pankaj murenvi
zaKHm tire hain jo sab pale hue rakhe hain maine
zaKHm tire hain jo sab pale hue rakhe hain maine | ज़ख़्म तिरे हैं जो सब पाले हुए रखे हैं मैंने
- Pankaj murenvi
ज़ख़्म
तिरे
हैं
जो
सब
पाले
हुए
रखे
हैं
मैंने
वो
कुछ
ख़त
अब
तक
भी
सँभाले
हुए
रखे
हैं
मैंने
- Pankaj murenvi
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सब
परिंदों
से
प्यार
लूँगा
मैं
पेड़
का
रूप
धार
लूँगा
मैं
तू
निशाने
पे
आ
भी
जाए
अगर
कौन
सा
तीर
मार
लूँगा
मैं
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Tehzeeb Hafi
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अक्सर
ही
ज़ख़्म
इश्क़
में
पाले
हैं
औरतें
पर
कितने
टूटे
मर्द
सँभाले
हैं
औरतें
Abhishar Geeta Shukla
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सहर
की
आस
लगाए
हुए
हैं
वो
कि
जिन्हें
कमान-ए-शब
से
चले
तीर
की
ख़बर
भी
नहीं
Abhishek shukla
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दूर
इक
सितारा
है
और
वो
हमारा
है
आँख
तक
नहीं
लगती
कोई
इतना
प्यारा
है
छू
के
देखना
उसको
क्या
अजब
नज़ारा
है
तीर
आते
रहते
थे
फूल
किसने
मारा
है
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Kafeel Rana
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देखा
जो
खा
के
तीर
कमीं-गाह
की
तरफ़
अपने
ही
दोस्तों
से
मुलाक़ात
हो
गई
Hafeez Jalandhari
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किस
ने
हमारे
शहर
पे
मारी
है
रौशनी
हर
इक
मकाँ
के
ज़ख़्म
से
जारी
है
रौशनी
Nomaan Shauque
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ये
कैसे
सानिहे
अब
पेश
आने
लग
गए
हैं
तेरे
आग़ोश
में
हम
छटपटाने
लग
गए
हैं
बहुत
मुमकिन
है
कोई
तीर
हमको
आ
लगेगा
हम
ऐसे
लोग
जो
पंछी
उड़ाने
लग
गए
हैं
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Vikram Sharma
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जितने
भी
हैं
ज़ख़्म
तुम्हारे
सिल
देगी
होटल
में
खाने
का
आधा
बिल
देगी
सीधे
मुँह
जो
बात
नहीं
करती
है
जो
तुमको
लगता
है
वो
लड़की
दिल
देगी
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Shadab Asghar
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तीर
पर
तीर
लगाओ
तुम्हें
डर
किस
का
है
सीना
किस
का
है
मिरी
जान
जिगर
किस
का
है
Ameer Minai
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वो
बड़े
प्यार
से
कहते
हैं
कि
आप
अपने
हैं
और
अपनों
को
ही
तो
ज़ख़्म
दिए
जाते
हैं
Akash Rajpoot
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लोग
थोड़ी
सी
ज़रूरत
के
लिए
वोट
देते
हैं
मुसीबत
के
लिए
पूछते
हम
क्यूँ
नहीं
सरकार
से
लोग
लड़ते
क्यूँ
हैं
बिदअत
के
लिए
कर
दिए
सरकार
ने
बर्बाद
जो
घर
बनाए
थे
सुकूनत
के
लिए
क्या
मिरे
मंदिर
तिरी
क्या
मस्जिदें
यार
हैं
तो
सब
इबादत
के
लिए
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Pankaj murenvi
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हम
जब
कहती
हैं
मेरी
आँखें
दुख
में
बहती
हैं
मेरी
आँखें
चिट्ठी
ख़त
सब
यादों
के
ग़म
को
तेरे
सहती
हैं
मेरी
आँखें
पूछो
कभी
तो
इनसे
कितना
कुछ
तुम
से
कहती
हैं
मेरी
आँखें
तेरी
भी
हैं
क्या
इंतिज़ार
में
जैसे
रहती
हैं
मेरी
आँखें
तेरी
आँखों
में
पंकज
वो
क्या
अब
भी
रहती
हैं
मेरी
आँखें
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Pankaj murenvi
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जब
से
तार
मुहब्बत
के
मैंने
बाँधे
हैं
तुम
से
पूरे
जीवन
की
वीणा
के
सुर
सारे
है
तुम
से
Pankaj murenvi
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तू
चाहे
तो
मैं
दर्द
की
दवा
हो
जाऊँगा
एक
इशारे
पर
बस
तिरे
फ़ना
हो
जाऊँगा
Pankaj murenvi
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बढ़ता
सरदर्द
रहा
दिल
में
जब
तक
शब-गर्द
रहा
दिल
में
था
पाक
तरफ़
से
मेरे
तो
उसके
ही
गर्द
रहा
दिल
में
उसका
था
होके
रहना
बस
ये
बाकी
कर्द
रहा
दिल
में
गर्मी
थी
तुझ
सेे
बाद
तिरे
मौसम
भी
सर्द
रहा
दिल
में
पत्थर
पर
सर
मारा
मैंने
भी
बस
ये
दर्द
रहा
दिल
में
दुश्मन
ही
मेरे
दिल
का
है
बनके
हमदर्द
रहा
दिल
में
जो
गुज़री
हम
पर
ही
गुज़री
पंकज
बे-दर्द
रहा
दिल
में
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Pankaj murenvi
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