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Pankaj murenvi
log thodii si zaroorat ke li.e
log thodii si zaroorat ke li.e | लोग थोड़ी सी ज़रूरत के लिए
- Pankaj murenvi
लोग
थोड़ी
सी
ज़रूरत
के
लिए
वोट
देते
हैं
मुसीबत
के
लिए
पूछते
हम
क्यूँ
नहीं
सरकार
से
लोग
लड़ते
क्यूँ
हैं
बिदअत
के
लिए
कर
दिए
सरकार
ने
बर्बाद
जो
घर
बनाए
थे
सुकूनत
के
लिए
क्या
मिरे
मंदिर
तिरी
क्या
मस्जिदें
यार
हैं
तो
सब
इबादत
के
लिए
- Pankaj murenvi
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मुहब्बत
में
हमने
सियासत
न
की
तभी
इश्क़
में
कोई
बरकत
न
की
उसे
मानता
था
मैं
अपना
ख़ुदा
कभी
उसकी
लेकिन
इबादत
न
की
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RAJAT AWASTHI
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मैं
भूल
चुका
हूँ
कि
ये
वनवास
है
वन
है
इस
वक़्त
मेरे
सामने
सोने
का
हिरन
है
मैं
ध्यान
से
कुछ
सुन
ही
नहीं
पाऊँगा
सरकार
मैं
क्या
ही
बताऊँ
कि
मेरा
ध्यान
मगन
है
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Vikram Gaur Vairagi
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इस
दौर-ए-सियासत
का
इतना
सा
फ़साना
है
बस्ती
भी
जलानी
है
मातम
भी
मनाना
है
Unknown
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भले
ही
प्यार
हो
या
हिज्र
हो
या
फिर
सियासत
हो
कुछ
ऐसे
दोस्त
थे
हर
बात
पर
अश'आर
कहते
थे
Siddharth Saaz
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इन
से
उम्मीद
न
रख
हैं
ये
सियासत
वाले
ये
किसी
से
भी
मोहब्बत
नहीं
करने
वाले
Nadim Nadeem
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सियासत
के
चेहरे
पे
रौनक़
नहीं
ये
औरत
हमेशा
की
बीमार
है
Shakeel Jamali
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मुल्क
तो
मुल्क
घरों
पर
भी
है
क़ब्ज़ा
उस
का
अब
तो
घर
भी
नहीं
चलते
हैं
सियासत
के
बग़ैर
Zia Zameer
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ऐसा
नहीं
बस
आज
तुझे
प्यार
करेंगे
ता'उम्र
यही
काम
लगातार
करेंगे
सरकार
करेगी
नहीं
इस
देश
का
उद्धार
उद्धार
करेंगे
तो
कलाकार
करेंगे
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Tanoj Dadhich
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दीवार
उठाने
की
तिजारत
नहीं
आई
दिल्ली
में
रहे
और
सियासत
नहीं
आई
बिकने
को
तो
दिल
बिक
गया
बाज़ार
में
लेकिन
जो
आप
बताते
थे
वो
क़ीमत
नहीं
आई
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Obaid Azam Azmi
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ले
लो
बोसा
अपना
वापस
किस
लिए
तकरार
की
क्या
कोई
जागीर
हम
ने
छीन
ली
सरकार
की
Akbar Merathi
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इश्क़
मुहब्बत
मेरे
बस
की
बात
नहीं
है
ये
तुम
अपने
चरणों
में
लेलो
कान्हा
मुझको
तो
Pankaj murenvi
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इक
वो
जो
है
मेरी
आँखों
का
तारा
है
मैं
भी
उसका
हूँ
वो
भी
यार
हमारा
है
मुझको
मंज़ूर
नहीं
है
टुकड़ो
में
कोई
गर
तू
मेरा
है
फिर
सारा
का
सारा
है
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Pankaj murenvi
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हम
जब
कहती
हैं
मेरी
आँखें
दुख
में
बहती
हैं
मेरी
आँखें
चिट्ठी
ख़त
सब
यादों
के
ग़म
को
तेरे
सहती
हैं
मेरी
आँखें
पूछो
कभी
तो
इनसे
कितना
कुछ
तुम
से
कहती
हैं
मेरी
आँखें
तेरी
भी
हैं
क्या
इंतिज़ार
में
जैसे
रहती
हैं
मेरी
आँखें
तेरी
आँखों
में
पंकज
वो
क्या
अब
भी
रहती
हैं
मेरी
आँखें
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Pankaj murenvi
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आज
फिर
से
शाम
ढलने
को
है
साक़ी
मुझ
से
दुख
कोई
निकलने
को
है
साक़ी
उम्र
ग़म
में
यार
कटती
अब
नहीं
ये
मन
मुहब्बत
से
निकलने
को
है
साक़ी
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Pankaj murenvi
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दिल
अब
जब
भी
कहता
है
तुम
सेे
मिलने
को
हम
तेरी
यादों
से
राब्ता
कर
लेते
हैं
Pankaj murenvi
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