hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Asif gauri
tum mere the kisi zamaane men
tum mere the kisi zamaane men | तुम मेरे थे किसी ज़माने में
- Asif gauri
तुम
मेरे
थे
किसी
ज़माने
में
बस
यही
काफ़ी
है
ख़ुशी
के
लिए
- Asif gauri
Download Sher Image
दिलों
को
तेरे
तबस्सुम
की
याद
यूँँ
आई
कि
जगमगा
उठें
जिस
तरह
मंदिरों
में
चराग़
Firaq Gorakhpuri
Send
Download Image
30 Likes
उम्र
के
आख़िरी
मक़ाम
में
हम
मिल
भी
जाए
तो
क्या
ख़ुशी
होगी
क्या
सितम
तुम
को
देखने
के
लिए
हम
को
दुनिया
भी
देखनी
होगी
Read Full
Vikram Sharma
Send
Download Image
32 Likes
ख़ुशी
में
भी
ख़ुशी
होती
नहीं
अब
तेरा
ग़म
ही
सतह
पर
तैरता
है
Umesh Maurya
Send
Download Image
1 Like
चंद
कलियाँ
नशात
की
चुन
कर
मुद्दतों
महव-ए-यास
रहता
हूँ
तेरा
मिलना
ख़ुशी
की
बात
सही
तुझ
से
मिल
कर
उदास
रहता
हूँ
Sahir Ludhianvi
Send
Download Image
49 Likes
क्या
तकल्लुफ़
करें
ये
कहने
में
जो
भी
ख़ुश
है
हम
उस
से
जलते
हैं
Jaun Elia
Send
Download Image
105 Likes
तेरे
सिवा
भी
कई
रंग
ख़ुश
नज़र
थे
मगर
जो
तुझको
देख
चुका
हो
वो
और
क्या
देखे
Parveen Shakir
Send
Download Image
86 Likes
हाँ
यही
मेरी
ख़ुद-शनासी
है
जिस्म
ताज़ा
है
रूह
बासी
है
सब
हँसी
को
हँसी
समझते
हैं
तुम
तो
समझो
हँसी
उदासी
है
Read Full
Armaan khan
Send
Download Image
9 Likes
जाने
कैसे
ख़ुश
रहने
की
आदत
डाली
जाती
है
उनके
यहाँ
तो
बारिश
में
भी
धूप
निकाली
जाती
है
Ritesh Rajwada
Send
Download Image
40 Likes
हुनर
से
काम
लिया
पेंट
ब्रश
नहीं
तोड़ा
बना
लिया
तेरे
जैसा
ही
कोई
रंगों
से
मुझे
ये
डर
है
कि
मिल
जाएगी
तो
रो
दूँगा
मैं
जिस
ख़ुशी
को
तरसता
रहा
हूँ
बरसों
से
Read Full
Rahul Gurjar
Send
Download Image
9 Likes
इस
क़दर
हम
ख़ुश
रखेंगे
आपको
ससुराल
में
आपको
महसूस
होगा
जी
रहे
ननिहाल
में
दो
गुलाबों
की
तरह
है
दो
चमेली
की
तरह
फ़र्क़
बस
इतना
तुम्हारे
होंठ
में
और
गाल
में
Read Full
Tanoj Dadhich
Send
Download Image
24 Likes
Read More
कभी
था
वो
मेरा
जो
अब
है
नहीं
पर
मेरा
जब
वो
था
तब
किसी
का
नहीं
था
मेरी
बात
मानो
चलो
भी
तुम
आसिफ़
वो
जैसा
भी
था
पर
तुम्हारा
नहीं
था
Read Full
Asif gauri
Send
Download Image
1 Like
उसे
मुद्दत
से
जी
भर
के
नहीं
देखा
मुझे
अब
वो
नज़र
आए
तो
अच्छा
है
Asif gauri
Send
Download Image
1 Like
फ़क़त
अब
तो
दिलासा
रह
गया
है
बताओ
क्या
हमारा
रह
गया
है
निकल
कर
रूह
कब
की
जा
चुकी
है
बदन
पंखे
से
लटका
रह
गया
है
बग़ैर
उसके
मरा
मैं
भी
नहीं
और
बिछड़
कर
वो
भी
ज़िंदा
रह
गया
है
Read Full
Asif gauri
Download Image
0 Likes
बद्दुआ
क्यूँँ
करें
किसी
के
लिए
लोग
मरते
हैं
ज़िंदगी
के
लिए
Asif gauri
Send
Download Image
1 Like
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Shama Shayari
Jawani Shayari
Khwaahish Shayari
Fantasy Shayari
Nazara Shayari