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Mohit Subran
har ik lamhe men ham hanste hue maana nahin hote
har ik lamhe men ham hanste hue maana nahin hote | हर इक लम्हे में हम हँसते हुए माना नहीं होते
- Mohit Subran
हर
इक
लम्हे
में
हम
हँसते
हुए
माना
नहीं
होते
मगर
ऐसे
भी
तो
रो
रो
के
यूँँ
ज़ाया'
नहीं
होते
बिता
तू
भी
रहा
है
ज़िन्दगी
तन्हाइयों
में
ही
अगर
हम
साथ
होते
आज
तो
तन्हा
नहीं
होते
- Mohit Subran
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बात
करते
हुए
बे-ख़याली
में
ज़ुल्फ़ें
खुली
छोड़
दी
हम
निहत्थों
पे
उसने
ये
कैसी
बलाएँ
खुली
छोड़
दी
साथ
जब
तक
रहे
एक
लम्हे
को
भी
रब्त
टूटा
नहीं
उसने
आँखें
अगर
बंद
कर
ली
तो
बाँहें
खुले
छोड़
दी
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Khurram Afaq
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दिल
बना
दोस्त
तो
क्या
क्या
न
सितम
उस
ने
किए
हम
भी
नादां
थे
निभाते
रहे
नादान
के
साथ
Shakeel Badayuni
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जब
तक
जला
ये
हम
भी
जले
इसके
साथ
साथ
जब
बुझ
गया
चराग़
तो
सोना
पड़े
हमें
Abbas Qamar
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अभी
तो
जाग
रहे
हैं
चराग़
राहों
के
अभी
है
दूर
सहर
थोड़ी
दूर
साथ
चलो
Ahmad Faraz
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मुझे
अब
आइनों
की
क्या
ज़रूरत
मैं
अपने
साथ
अब
रहने
लगा
हूँ
Madan Mohan Danish
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मैं
अकेला
ही
चला
था
जानिब-ए-मंज़िल
मगर
लोग
साथ
आते
गए
और
कारवाँ
बनता
गया
Majrooh Sultanpuri
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बदले
मौसम
हालात
यहाँ
है
ख़ुशियों
की
बारात
यहाँ
होली
खेलेंगे
हम
भी
पर
खेलेंगे
तेरे
साथ
यहाँ
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Kaviraj " Madhukar"
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बारिशें
जाड़े
की
और
तन्हा
बहुत
मेरा
किसान
जिस्म
और
इकलौता
कंबल
भीगता
है
साथ-साथ
Parveen Shakir
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दिवाली
भी
दिवाली
अब
नहीं
है
तुम्हारे
साथ
हर
दिन
थी
दिवाली
Tanoj Dadhich
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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तिरे
इस
चाँद
से
माथे
से
फिसला
माँग-टीका
तिरे
लब
को
न
छू
पाई
कभी,
वो
लाली
हूँ
मैं
तिरी
पाज़ेब
से
टूटा
हुआ
बद-बख़्त
घुंघरू
तिरे
ही
कान
की
खोई
हुई
इक
बाली
हूँ
मैं
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Mohit Subran
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किस
को
हैं
फ़ुर्सतें
कि
किसी
की
ख़ुशी
चुभे
सब
अपने-अपने
दुख
में
ही
मसरूफ़
हैं
यहाँ
Mohit Subran
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न
डालो
पाँव
में
बेड़ी,
इसे
तुम
आगे
बढ़ने
दो
यही
लड़की
तुम्हें
पहचान
दुनिया
में
दिलाएगी
Mohit Subran
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है
आया
आख़िरी
दिन
साल
का
तो
ज़ेहन
में
यक-दम
गुज़रते
साल
की
यादों
का
इक
जंगल
उभरता
है
Mohit Subran
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गूँजती
हैं
कानों
में
जो
ये
सदाएँ
हैं
कि
तुम
हो
आ
लिपट
जाती
हैं
मुझ
सेे
ये
हवाएँ
हैं
कि
तुम
हो
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Mohit Subran
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