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Mohit Subran
aap-apne men hi gum rahne laga hai
aap-apne men hi gum rahne laga hai | आप-अपने में ही गुम रहने लगा है
- Mohit Subran
आप-अपने
में
ही
गुम
रहने
लगा
है
एक
ख़ाली-पन
यहाँ
उतरा
है
जब
से
दिल
मुकम्मल
ही
नहीं
महसूस
करता
कुछ
तो
है
जो
हाथ
से
छूटा
है
इस
के
- Mohit Subran
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उनकी
सोहबत
में
गए
सँभले
दोबारा
टूटे
हम
किसी
शख़्स
को
दे
दे
के
सहारा
टूटे
ये
अजब
रस्म
है
बिल्कुल
न
समझ
आई
हमें
प्यार
भी
हम
ही
करें
दिल
भी
हमारा
टूटे
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Vikram Gaur Vairagi
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उनके
दुखों
को
शे'र
में
कहना
तो
था
मगर
लड़के
समझ
न
पाएँ
कभी
लड़कियों
का
दुख
Ankit Maurya
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ये
करिश्मा
हुआ
चूमने
से
उसे
तीरगी
पर
खुली
रोशनी
की
समझ
Neeraj Neer
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इक
दूसरे
को
छोड़
के
जाने
की
बात
है
अपनी
नहीं
ये
सारे
ज़माने
की
बात
है
बस
यूँँ
समझ
लो
उन
सेे
मेरा
कद
बलंद
है
जिनके
लबों
पे
मुझको
गिराने
की
बात
है
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Kashif Sayyed
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जैसे
मेरी
निगाह
ने
देखा
न
हो
कभी
महसूस
ये
हुआ
तुझे
हर
बार
देख
कर
Shad Azimabadi
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फ़िक्र-ए-ईजाद
में
गुम
हूँ
मुझे
ग़ाफ़िल
न
समझ
अपने
अंदाज़
पर
ईजाद
करूँँगा
तुझ
को
Jaun Elia
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हैं
लहू
से
कई
गुना
बढ़कर
वो
जो
एहसास
के
मरासिम
हैं
Shadan Ahsan Marehrvi
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महसूस
कर
रहा
था
उसे
अपने
आस
पास
अपना
ख़याल
ख़ुद
ही
बदलना
पड़ा
मुझे
Ameer Qazalbash
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ये
नहीं
है
कि
वो
एहसान
बहुत
करता
है
अपने
एहसान
का
एलान
बहुत
करता
है
आप
इस
बात
को
सच
ही
न
समझ
लीजिएगा
वो
मेरी
जान
मेरी
जान
बहुत
करता
है
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Jawwad Sheikh
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इस
क़दर
हम
ख़ुश
रखेंगे
आपको
ससुराल
में
आपको
महसूस
होगा
जी
रहे
ननिहाल
में
दो
गुलाबों
की
तरह
है
दो
चमेली
की
तरह
फ़र्क़
बस
इतना
तुम्हारे
होंठ
में
और
गाल
में
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Tanoj Dadhich
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ज्यूँँ
यादों
में
वो
आते
हैं
त्यूँँ
पलकों
से
गिर
जाते
हैं
मेरे
ही
बोए
आँसू
हैं
हर
शब
जो
ये
उग
आते
हैं
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Mohit Subran
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पहचान
जो
कभी
भी
नहीं
चाहता
था
मैं
अफ़सोस
अब
वही
मिरी
पहचान
हो
गई
Mohit Subran
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हुकूमत
दाँव
खेली
जा
रही
है
बिचारी
जनता
फँसती
जा
रही
है
न
ही
राइट
न
ही
सेंटर
न
ही
लेफ़्ट
अलग
रस्ते
पे
दिल्ली
जा
रही
है
सियासत
जिस
तरह
की
हो
रही
है
वतन
तक़्सीम
करती
जा
रही
है
जो
भी
आवाज़
सच
को
उठ
रही
है
वो
हर
आवाज़
कुचली
जा
रही
है
बचाओ
मिल
के
सब
जमहूरियत
को
कि
ये
हाथों
से
छीनी
जा
रही
है
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Mohit Subran
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किस
को
तमन्ना
फ़त्ह
की
किस
को
ख़याल
अब
जीत
का
मैं
हारने
वाला
हूँ
जो
उस
को
बचा
लूँ
काफ़ी
है
Mohit Subran
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तुम्हें
तो
यार
मुयस्सर
है
बस
ख़ुशी
ही
ख़ुशी
तुम्हारा
क्या
जिसे
चाहो
उसे
उदास
करो
Mohit Subran
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