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Mohit Subran
aaghaaz to achha nahin hai is kahaanii ka magar
aaghaaz to achha nahin hai is kahaanii ka magar | आग़ाज़ तो अच्छा नहीं है इस कहानी का मगर
- Mohit Subran
आग़ाज़
तो
अच्छा
नहीं
है
इस
कहानी
का
मगर
ये
देखना
दिलचस्प
होगा
अंत
क्या
होगा
भला
- Mohit Subran
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तुम
कली
पर
निखार
आने
दो
देखना
डाल
ख़ुद
झटक
देगी
Vishal Bagh
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आज
फिर
दिल
में
तिरे
दीद
की
हसरत
जागी
काश
फिर
काम
कोई
तुझ
से
ज़रूरी
निकले
Nilofar Noor
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हर
आदमी
में
होते
हैं
दस
बीस
आदमी
जिस
को
भी
देखना
हो
कई
बार
देखना
Nida Fazli
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बग़ैर
चश्में
के
जो
देख
भी
न
पाता
है
वो
बेवक़ूफ़
मुझे
देखना
सिखाता
है
अगर
ये
वक़्त
डुबोएगा
मेरी
नाव
को
तो
इस
सेे
कह
दो
मुझे
तैरना
भी
आता
है
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Vikram Gaur Vairagi
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ख़ुद
को
शीशा
कर
लिया
है
यार
मैंने
अब
तो
तेरा
देखना
बनता
है
मुझ
को
Neeraj Neer
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यूँँ
बिछड़ना
भी
बहुत
आसाँ
न
था
उस
से
मगर
जाते
जाते
उस
का
वो
मुड़
कर
दोबारा
देखना
Parveen Shakir
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आँख
की
बेबसी
दिल
का
डर
देखना
तुम
किसी
दिन
ग़रीबों
का
घर
देखना
Alankrat Srivastava
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फ़ुज़ूल-ख़र्ची
नहीं
करेंगे
Rehman Faris
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आइने
की
आँख
ही
कुछ
कम
न
थी
मेरे
लिए
जाने
अब
क्या
क्या
दिखाएगा
तुम्हारा
देखना
Parveen Shakir
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सरफ़रोशी
की
तमन्ना
अब
हमारे
दिल
में
है
देखना
है
ज़ोर
कितना
बाज़ू-ए-क़ातिल
में
है
Bismil Azimabadi
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जिरह
जब-जब
हुई
इतिहास
को
लेकर
बदल
तब-तब
गया
भूगोल
दुनिया
का
Mohit Subran
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आख़िरश
कोई
इशारा
किसी
को
क्यूँ
देंगे
जब
न
सह
पाएँगे
चुप-चाप
चले
जाएँगे
Mohit Subran
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वही
कली
है
वही
फूल
है
वही
गुल
है
मगर
मैं
देखता
हूँ
बाग़बान
इक
नया
है
Mohit Subran
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सख़्त
थे
जैसे
भी
थे
वैसे
ही
मुमकिन
चाहिए
कुछ
भी
बोलें
आप
हम
से
हम
को
लेकिन
चाहिए
रखिए
अपने
'अच्छे
दिन'
ये
और
सारे
जुमले
भी
हम
को
तो
वापस
हमारे
वो
बुरे
दिन
चाहिए
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Mohit Subran
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रखो
उम्मीद
ज़िन्दा
साल
के
अंतिम
महीने
तक
वो
बिछड़ा
शख़्स
क्या
मालूम
मिल
जाए
दिसंबर
में
Mohit Subran
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