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Mohit Subran
aakhirsh koii ishaara kisi ko kyuuñ denge
aakhirsh koii ishaara kisi ko kyuuñ denge | आख़िरश कोई इशारा किसी को क्यूँ देंगे
- Mohit Subran
आख़िरश
कोई
इशारा
किसी
को
क्यूँ
देंगे
जब
न
सह
पाएँगे
चुप-चाप
चले
जाएँगे
- Mohit Subran
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इशारा
कर
रहे
हैं
बाल
ये
बिखरे
हुए
क्या
तू
मेरे
पास
आया
है
कहीं
होते
हुए
क्या
ये
इतना
हँसने
वाले
इश्क़
में
टूटे
हुए
लोग
तू
इन
से
पूछना
अंदर
से
भी
अच्छे
हुए
क्या
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Kushal Dauneria
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भाँप
ही
लेंगे
इशारा
सर-ए-महफ़िल
जो
किया
ताड़ने
वाले
क़यामत
की
नज़र
रखते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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हर
एक
सम्त
यहाँ
वहशतों
का
मस्कन
है
जुनूँ
के
वास्ते
सहरा
ओ
आशियाना
क्या
Azhar Iqbal
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एक
दिन
मेरी
ख़ामुशी
ने
मुझे
लफ़्ज़
की
ओट
से
इशारा
किया
Anjum Saleemi
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ऐ
आसमाँ
किस
लिए
इस
दर्जा
बरहमी
हम
ने
तो
तिरी
सम्त
इशारा
नहीं
किया
Ambreen Haseeb Ambar
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उसकी
बस्ती
से
पहले
कब्रिस्तान
आशिकों
के
लिए
इशारा
था
Unknown
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यूँँ
तो
वो
इत्रदान
था
लेकिन
ये
क्या
हुआ
टूटा
तो
एक
सम्त
भी
ख़ुशबू
नहीं
गई
Afzal Ali Afzal
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ये
वो
क़बीला
है
जो
हुस्न
को
ख़ुदा
माने
यहाँ
पे
कौन
तेरी
बात
का
बुरा
माने
इशारा
कर
दिया
है
आपकी
तरफ़
मैंने
ये
बच्चे
पूछ
रहे
थे
कि
बे-वफ़ा
माने
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Kushal Dauneria
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उसी
वक़्त
अपने
क़दम
मोड़
लेना
नदी
पार
से
जब
इशारा
करूँँगा
Siddharth Saaz
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तुम
ने
किया
है
तुम
ने
इशारा
बहुत
ग़लत
दरिया
बहुत
दुरुस्त
किनारा
बहुत
ग़लत
Nabeel Ahmed Nabeel
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ये
उदासी
भरी
इक
रात
भला
कुछ
भी
नहीं
हम
ने
वो
दिन
भी
हैं
काटे
कि
जो
काटे
न
गए
Mohit Subran
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किसी
दिन
तो
हमें
था
टूटना
देखो
गए
हम
टूट
बिखरना
रह
गया
है
अब
बिखर
भी
जाएँगे
इक
दिन
Mohit Subran
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नज़र
को
घुमाओ
ज़रा
और
देखो
कि
मौजूद
किरदार
इक-इक
यहीं
है
तुम्हारी
कहानी
हक़ीक़त
अगर
है
हमारा
भी
क़िस्सा
ख़याली
नहीं
है
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Mohit Subran
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बचाए
फ़ोन
ने
ही
रक्खा
है
माँ
और
मौसी
को
वगरना
दो
सगी
बहनें
ये
तन्हाई
से
मर
जाएँ
Mohit Subran
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अगर
चुनना
पड़े
तुझ
में
या
दुश्मन
में
मैं
आँखें
बंद
कर
दुश्मन
चुनूँगा
दोस्त
Mohit Subran
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