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Mohit Subran
kisi din to ha
kisi din to ha | किसी दिन तो हमें था टूटना देखो गए हम टूट
- Mohit Subran
किसी
दिन
तो
हमें
था
टूटना
देखो
गए
हम
टूट
बिखरना
रह
गया
है
अब
बिखर
भी
जाएँगे
इक
दिन
- Mohit Subran
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क़दम-क़दम
पे
बिछी
हैं
तो
ठोकरें
केवल
गरीबों
के
लिए
इक
बद-दुआ
है
ये
दुनिया
Mohit Subran
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तेरा
चेहरा
देख
लिया
मैं
ने
धोका
देख
लिया
चेहरे
की
तह
में
मौजूद
इक
और
चेहरा
देख
लिया
झूट
कपट
मक्कारी
का
लम्बा
अर्सा
देख
लिया
सात
बरस
और
नौ
मह
को
कर
के
ज़ाया'
देख
लिया
क्या
रक्खा
है
पास
तिरे
ये
भी
लहजा
देख
लिया
दरिया
के
घर
में
रह
के
ख़ुद
को
प्यासा
देख
लिया
छोड़
दिया
मिलना
सब
से
ख़ाली
कमरा
देख
लिया
तन्हाई
भी
ख़ूँ
रो
दे
ऐसा
तन्हा
देख
लिया
चल
ख़ुश
रह
तेरी
ख़ातिर
तेरा
चूड़ा
देख
लिया
रोती
क्यूँ
है
तू
ने
तो
चख
के
पैसा
देख
लिया
सब
हासिल
कब
होता
है
वक़्त
का
काँटा
देख
लिया
वाक़िफ़
हूँ
हालत
से
तिरी
तुझ
को
सहता
देख
लिया
उस
ने
ऐसी
गत
की
है
फिर
भी
हँसता
देख
लिया
सह
लेती
हैं
दुख
भी
गर
हो
जो
पैसा
देख
लिया
दौलत
का
जादू-टोना
आख़िर
चलता
देख
लिया
कारण
उस
इक
शख़्स
के
हाए
हम
ने
क्या-क्या
देख
लिया
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Mohit Subran
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दिल
में
रह-रह
के
है
उठता
एक
दिन
ऐसा
करूँँ
मैं
ले
के
ख़ुशियों
का
हथौड़ा
ग़म
की
छाती
तोड़
दूँ
मैं
Mohit Subran
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न
जाने
कब
भला
मुझ
पे
गिरेगी
बर्क़
आकर
न
जाने
कब
भला
छूटूँगा
इस
ज़िंदान
से
मैं
न
जाने
कब
भला
टूटेगी
सर
पे
कोई
आफ़त
न
जाने
कब
भला
जाऊँगा
आख़िर
जान
से
मैं
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Mohit Subran
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मुझे
ग़म
नहीं
दिल
ग़मों
से
भरा
है
मुझे
ये
ख़ुशी
है
ये
ख़ाली
नहीं
है
Mohit Subran
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