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Mohit Subran
dil men rah-rah ke hai uthata ek din aisa karoon main
dil men rah-rah ke hai uthata ek din aisa karoon main | दिल में रह-रह के है उठता एक दिन ऐसा करूँँ मैं
- Mohit Subran
दिल
में
रह-रह
के
है
उठता
एक
दिन
ऐसा
करूँँ
मैं
ले
के
ख़ुशियों
का
हथौड़ा
ग़म
की
छाती
तोड़
दूँ
मैं
- Mohit Subran
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पैग़ाम-ए-हयात-ए-जावेदाँ
था
हर
नग़्मा-ए-कृष्ण
बाँसुरी
का
Hasrat Mohani
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जब
ज़रा
रात
हुई
और
मह
ओ
अंजुम
आए
बार-हा
दिल
ने
ये
महसूस
किया
तुम
आए
Asad Bhopali
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शब
की
आग़ोश
में
महताब
उतारा
उस
ने
मेरी
आँखों
में
कोई
ख़्वाब
उतारा
उस
ने
Azm Shakri
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ये
आग
वाग
का
दरिया
तो
खेल
था
हम
को
जो
सच
कहें
तो
बड़ा
इम्तिहान
आँसू
हैं
Abhishek shukla
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किसी
से
छोटी
सी
एक
उम्मीद
बाँध
लीजिए
मोहब्बतों
का
अगर
जनाज़ा
निकालना
है
Shakeel Jamali
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लबों
में
आ
के
क़ुल्फ़ी
हो
गए
अश'आर
सर्दी
में
ग़ज़ल
कहना
भी
अब
तो
हो
गया
दुश्वार
सर्दी
में
Sarfaraz Shahid
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उतर
कर
आसमानों
से
ज़मीं
की
ख़ाक
पर
बैठो
ख़ुदा
ने
सब
सेे
ऊँची
आपको
मसनद
अता
की
है
Pawan mahabodhi
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जब
तक
जला
ये
हम
भी
जले
इसके
साथ
साथ
जब
बुझ
गया
चराग़
तो
सोना
पड़े
हमें
Abbas Qamar
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ज़िंदगी
है
या
कोई
तूफ़ान
है
हम
तो
इस
जीने
के
हाथों
मर
चले
Khwaja Meer Dard
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तकल्लुफ़
छोड़कर
आओ
उसे
फिर
से
जिया
जाए
हमारा
बचपना
जो
एल्बमों
में
क़ैद
रहता
है
Shiva awasthi
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अभी
से
आज
से
हम
छोड़
दें
सिगरेट
पीना
मगर
कोई
कहे
तो
ये
तुम्हें
मेरी
क़सम
है
Mohit Subran
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निकाला
बीच
से
जा
सकता
था
उस
बात
को
लेकिन
ग़लत-फ़हमी
बढ़ी
इतनी
दिलों
को
शक
से
भर
डाला
बहुत
छोटी
सी
कोई
बात
थी
जिस
पे
लड़े
थे
हम
मगर
उस
बात
ने
ही
दरमियाँ
सब
ख़त्म
कर
डाला
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Mohit Subran
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गुज़ार
लेते
हैं
जैसे
भी
आप
दिन
लेकिन
ये
हम
ही
जानते
हैं
रात
कैसे
कटती
है
Mohit Subran
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जो
ख़ाली
पेट
हैं
उनकी
मुराद
है
रोटी
वो
जिनके
पेट
भरे
हैं
जहान
चाहते
हैं
Mohit Subran
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पलकों
में
रह
गया
है
ये
जो
अटक
के
इक
अश्क
अश्क
ये
आख़िरी
भी
पलकों
से
रुख़्सत
होता
Mohit Subran
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