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Mohit Subran
qadam-qadam pe bichi hain to thokren keval
qadam-qadam pe bichi hain to thokren keval | क़दम-क़दम पे बिछी हैं तो ठोकरें केवल
- Mohit Subran
क़दम-क़दम
पे
बिछी
हैं
तो
ठोकरें
केवल
गरीबों
के
लिए
इक
बद-दुआ
है
ये
दुनिया
- Mohit Subran
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मकाँ
तो
है
नहीं
जो
खींच
दें
दीवार
इस
दिल
में
कोई
दूजा
नहीं
रह
पाएगा
अब
यार
इस
दिल
में
जहाँ
भर
में
लुटाते
फिर
रहे
है
कम
नहीं
होता
तुम्हारे
वास्ते
इतना
रखा
था
प्यार
इस
दिल
में
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Bhaskar Shukla
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बताऊँ
क्या
तुझे
ऐ
हम-नशीं
किस
से
मोहब्बत
है
मैं
जिस
दुनिया
में
रहता
हूँ
वो
इस
दुनिया
की
औरत
है
Asrar Ul Haq Majaz
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हुआ
है
तुझ
से
बिछड़ने
के
बाद
ये
मालूम
कि
तू
नहीं
था
तेरे
साथ
एक
दुनिया
थी
Ahmad Faraz
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अपनी
दुनिया
भी
चल
पड़े
शायद
इक
रुका
फ़ैसला
किया
जाए
Madan Mohan Danish
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इसी
होनी
को
तो
क़िस्मत
का
लिखा
कहते
हैं
जीतने
का
जहाँ
मौक़ा
था
वहीं
मात
हुई
Manzar Bhopali
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टक
गोर-ए-ग़रीबाँ
की
कर
सैर
कि
दुनिया
में
उन
ज़ुल्म-रसीदों
पर
क्या
क्या
न
हुआ
होगा
Meer Taqi Meer
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इस
दौर
के
मर्दों
की
जो
की
शक्ल-शुमारी
साबित
हुआ
दुनिया
में
ख़्वातीन
बहुत
हैं
Sarfaraz Shahid
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जब
आ
जाती
है
दुनिया
घूम
फिर
कर
अपने
मरकज़
पर
तो
वापस
लौट
कर
गुज़रे
ज़माने
क्यूँँ
नहीं
आते
Ibrat Machlishahri
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बना
कर
हमने
दुनिया
को
जहन्नुम
ख़ुदा
का
काम
आसाँ
कर
दिया
है
Rajesh Reddy
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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किस
को
तमन्ना
फ़त्ह
की
किस
को
ख़याल
अब
जीत
का
मैं
हारने
वाला
हूँ
जो
उस
को
बचा
लूँ
काफ़ी
है
Mohit Subran
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ये
उदासी
भरी
इक
रात
भला
कुछ
भी
नहीं
हम
ने
वो
दिन
भी
हैं
काटे
कि
जो
काटे
न
गए
Mohit Subran
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पगड़ियों
तक
को
नहीं
छोड़ा
भला
सर
पे
हमारे
आँधियाँ
सब
कुछ
उड़ा
कर
ले
गईं
घर
से
हमारे
Mohit Subran
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पहचान
जो
कभी
भी
नहीं
चाहता
था
मैं
अफ़सोस
अब
वही
मिरी
पहचान
हो
गई
Mohit Subran
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हाँ
मेरे
साथ
कई
नफ़्सियाती
मसअले
हैं
तमाम
ज़हनी
मसाइल
से
जूझता
हूँ
मैं
ये
ज़ेहन
मेरा
न
मुझ
को
कहीं
निगल
बैठे
मुझे
बचाओ
रफ़ीक़ो
कि
डूबता
हूँ
मैं
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Mohit Subran
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