गुलाबहाथमेंहोआँखमेंसिताराहो
कोईवजूदमोहब्बतकाइस्तिआ'राहो
मैंगहरेपानीकीइसरौकेसाथबहतीरहूँ
जज़ीराहोकिमुक़ाबिलकोईकिनाराहो
कभी-कभारउसेदेखलेंकहींमिललें
येकबकहाथाकिवोख़ुश-बदनहमाराहो
क़ुसूरहोतोहमारेहिसाबमेंलिखजाए
मोहब्बतोंमेंजोएहसानहोतुम्हाराहो
येइतनीरातगएकौनदस्तकेंदेगा
कहींहवाकाहीउसनेनरूपधाराहो
उफ़ुक़तोक्याहैदर-ए-कहकशाँभीछूआएँ
मुसाफ़िरोंकोअगरचाँदकाइशाराहो
मैंअपनेहिस्सेकेसुखजिसकेनामकरडालूँ
कोईतोहोजोमुझेइसतरहकाप्याराहो
अगरवजूदमेंआहंगहैतोवस्लभीहै
वोचाहेनज़्मकाटुकड़ाकिनस्र-पाराहो