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Manoj Devdutt
naseeb men likha hata raha hooñ main
naseeb men likha hata raha hooñ main | नसीब में लिखा हटा रहा हूँ मैं
- Manoj Devdutt
नसीब
में
लिखा
हटा
रहा
हूँ
मैं
समय
तभी
अधिक
लगा
रहा
हूँ
मैं
- Manoj Devdutt
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किसी
को
साल-ए-नौ
की
क्या
मुबारकबाद
दी
जाए
कैलन्डर
के
बदलने
से
मुक़द्दर
कब
बदलता
है
Aitbar Sajid
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किसी
किसी
को
नसीब
हैं
ये
उदासियाँ
भी
किसी
को
ये
भी
बता
न
पाए
उदास
लड़के
Vikas Sahaj
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परिंद
पेड़
से
परवाज़
करते
जाते
हैं
कि
बस्तियों
का
मुक़द्दर
बदलता
जाता
है
Asad Badayuni
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मैं
उन्हीं
आबादियों
में
जी
रहा
होता
कहीं
तुम
अगर
हँसते
नहीं
उस
दिन
मेरी
तक़दीर
पर
Zia Mazkoor
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कुछ
एक
की
हम
जैसी
क़िस्मत
होती
है
बाकी
सब
की
अच्छी
क़िस्मत
होती
है
Bhaskar Shukla
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गर
डूबना
ही
अपना
मुक़द्दर
है
तो
सुनो
डूबेंगे
हम
ज़रूर
मगर
नाख़ुदा
के
साथ
Kaifi Azmi
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मेरी
क़िस्मत
कि
ये
दुनिया
मुझे
पहचानती
है
लोग
मर
जाते
हैं
पहचान
बनाने
के
लिए
Nadeem Farrukh
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तुम
सितारों
के
भरोसे
पे
न
बैठे
रहना
अपनी
तदबीर
से
तक़दीर
बनाते
जाओ
Sada Ambalvi
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किताब-ए-मुक़द्दर
में
रांझा
दिवाना
मगर
हीर
बेहद
सयानी
लिखी
थी
Amaan Pathan
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अपनी
क़िस्मत
में
सभी
कुछ
था
मगर
फूल
ना
थे
तुम
अगर
फूल
ना
होते
तो
हमारे
होते
Ashfaq Nasir
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ग़ज़लगो
को
ग़ज़ल
समझा
रहे
हो
तुम
पता
है
क्या
किसे
बतला
रहे
हो
तुम
जहाँ
जब
बह
रहा
है
इक
तरफ़
तो
फिर
जहाँ
से
ही
अलग
क्यूँँ
जा
रहे
हो
तुम
पता
है
मैं
अभी
पीता
नहीं
फिर
भी
मुझी
को
जाम
क्यूँँ
पकड़ा
रहे
हो
तुम
दिखाकर
ख़्वाब
अच्छे
राह
में
मेरी
नुकीले
तार
क्यूँँ
बिछवा
रहे
हो
तुम
भले
अपनी
ख़ुशी
हम
सेे
छिपा
लेना
अभी
ग़म
क्यूँँ
छिपाते
जा
रहे
हो
तुम
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Manoj Devdutt
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अब
मौसम-ए-बहार
पर
ग़ज़ल
लिखी
है
फिर
अपने
एक
यार
पर
ग़ज़ल
लिखी
है
तेरी
पुकार
मेरी
रूह
तक
गई
थी
फिर
बस
तेरी
पुकार
पर
ग़ज़ल
लिखी
है
तुम
सेे
जुदा
नहीं
हुआ
अभी
तलक
मैं
तुम्हारे
फिर
ख़ुमार
पर
ग़ज़ल
लिखी
है
पहले
लिखी
रक़ीब
पर
ग़ज़ल
हम
ही
नें
बस
फिर
हम
ही
ने
प्यार
पर
ग़ज़ल
लिखी
है
इक
वा'दा
तूने
जो
मनोज
से
किया
था
बस
उसके
इंतिज़ार
पर
ग़ज़ल
लिखी
है
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Manoj Devdutt
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जहाँ
सीधे
न
जाया
जा
सके
वहाँ
फिर
घूम
कर
जाया
करो
Manoj Devdutt
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आदतें
जब
ख़राब
होने
लगी
हाथ
में
फिर
शराब
होने
लगी
सिर्फ़
तुझ
सेे
हुई
मोहब्बत
हमें
और
फिर
बे-हिसाब
होने
लगी
दुनिया
में
ठीक
था
शुरू
में
सभी
दुनिया
अब
बे-नकाब
होने
लगी
ज़िन्दगी
में
बची
नहीं
रोशनी
फिर
माँ
इक
आफ़ताब
होने
लगी
बोलना
हर
दफ़ा
मुनासिब
नहीं
कामयाबी
जबाब
होने
लगी
की
मोहब्बत
मनोज
ने
जिस
सेे
अब
याद
उसकी
अज़ाब
होने
लगी
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Manoj Devdutt
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वहाँ
होने
के
लिए
मुझको
अब
वहाँ
आने
की
ज़रूरत
है
क्या
Manoj Devdutt
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