ghazalgo ko ghazal samjha rahe ho tum | ग़ज़लगो को ग़ज़ल समझा रहे हो तुम

  - Manoj Devdutt
ग़ज़लगोकोग़ज़लसमझारहेहोतुम
पताहैक्याकिसेबतलारहेहोतुम
जहाँजबबहरहाहैइकतरफ़तोफिर
जहाँसेहीअलगक्यूँँजारहेहोतुम
पताहैमैंअभीपीतानहींफिरभी
मुझीकोजामक्यूँँपकड़ारहेहोतुम
दिखाकरख़्वाबअच्छेराहमेंमेरी
नुकीलेतारक्यूँँबिछवारहेहोतुम
भलेअपनीख़ुशीहमसेेछिपालेना
अभीग़मक्यूँँछिपातेजारहेहोतुम
  - Manoj Devdutt
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