ab mausam-e-bahaar par ghazal likhi hai | अब मौसम-ए-बहार पर ग़ज़ल लिखी है

  - Manoj Devdutt
अबमौसम-ए-बहारपरग़ज़ललिखीहै
फिरअपनेएकयारपरग़ज़ललिखीहै
तेरीपुकारमेरीरूहतकगईथी
फिरबसतेरीपुकारपरग़ज़ललिखीहै
तुमसेेजुदानहींहुआअभीतलकमैं
तुम्हारेफिरख़ुमारपरग़ज़ललिखीहै
पहलेलिखीरक़ीबपरग़ज़लहमहीनें
बसफिरहमहीनेप्यारपरग़ज़ललिखीहै
इकवा'दातूनेजोमनोजसेकियाथा
बसउसकेइंतिज़ारपरग़ज़ललिखीहै
  - Manoj Devdutt
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