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Siddharth Saaz
yahaañ pe kal ki raat sard thii har ek roz se
yahaañ pe kal ki raat sard thii har ek roz se | यहाँ पे कल की रात सर्द थी हर एक रोज़ से
- Siddharth Saaz
यहाँ
पे
कल
की
रात
सर्द
थी
हर
एक
रोज़
से
सो
रात
भर
बुझा
नहीं
तुम्हारी
याद
का
अलाव
- Siddharth Saaz
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ईद
के
रोज़
यही
अपनी
दु'आ
है
रब
से
मुल्क
में
अमन
का,
उलफ़त
का
बसेरा
हो
जाए
हर
परेशानी
से
हर
शख़्स
को
मिल
जाए
नजात
इस
सियह
रात
का
बस
जल्द
सवेरा
हो
जाए
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Zaki Azmi
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मौत
ने
सारी
रात
हमारी
नब्ज़
टटोली
ऐसा
मरने
का
माहौल
बनाया
हमने
घर
से
निकले
चौक
गए
फिर
पार्क
में
बैठे
तन्हाई
को
जगह-जगह
बिखराया
हमने
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Shariq Kaifi
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सखी
को
हमारी
नज़र
लग
न
जाए
उसे
ख़्वाब
में
रात
भर
देखते
हैं
Sahil Verma
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उतरी
हुई
नदी
को
समुंदर
कहेगा
कौन
सत्तर
अगर
हैं
आप
बहत्तर
कहेगा
कौन
पपलू
से
उनकी
बीवी
ने
कल
रात
कह
दिया
मैं
देखती
हूँ
आपको
शौहर
कहेगा
कौन
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Paplu Lucknawi
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चाँद
तारे
इक
दिया
और
रात
का
कोमल
बदन
सुब्ह-दम
बिखरे
पड़े
थे
चार
सू
मेरी
तरह
Aziz Nabeel
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ठंडी
चाय
की
प्याली
पी
के
रात
की
प्यास
बुझाई
है
Rais Farog
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कब
ठहरेगा
दर्द
ऐ
दिल
कब
रात
बसर
होगी
सुनते
थे
वो
आएँगे
सुनते
थे
सहर
होगी
Faiz Ahmad Faiz
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आज
की
रात
भी
गुज़री
है
मिरी
कल
की
तरह
हाथ
आए
न
सितारे
तिरे
आँचल
की
तरह
Ameer Qazalbash
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उसे
यूँँ
चेहरा-चेहरा
ढूँढता
हूँ
वो
जैसे
रात-दिन
सड़कों
पे
होगा
Shariq Kaifi
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जिस
पर
हमारी
आँख
ने
मोती
बिछाए
रात
भर
भेजा
वही
काग़ज़
उसे
हम
ने
लिखा
कुछ
भी
नहीं
Bashir Badr
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पलटा
दे
तक़दीर
हमारी
आकर
माथा
चूम
हमारा
Siddharth Saaz
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हँसी
रहती
है
होंठों
पर
हमारे
हम
उसको
जब
भी
हँसते
देखते
हैं
Siddharth Saaz
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तेरा
मोहब्बत
से
हार
जाना
मेरी
मोहब्बत
की
हार
भी
है
Siddharth Saaz
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जुदाई
से
जुड़ा
जब
फ़ैसला
लेंगे
तो
सब
सेे
पहले
तेरा
मशवरा
लेंगे
मुहब्बत
के
कहीं
इक
रास्ते
में
हम
भटक
जाएँगे
तो
तेरा
पता
लेंगे
तेरे
होंठो
से
ग़र
इक
काम
लेना
हो
तेरे
होंठो
से
हम
बस
इक
दु'आ
लेंगे
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Siddharth Saaz
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तू
ये
समझता
है
कि
कोई
दुख
नहीं
हमें
तुझ
सेे
जो
चार
बात
हँस
के
बोलते
हैं
हम
Siddharth Saaz
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