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Manoj Devdutt
bete kamaane hi nikalte hain gharo se
bete kamaane hi nikalte hain gharo se | बेटे कमाने ही निकलते हैं घरों से
- Manoj Devdutt
बेटे
कमाने
ही
निकलते
हैं
घरों
से
घर
को
चलाने
ही
निकलते
हैं
घरों
से
माना
विदा
होते
नहीं
हैं
हम
कभी
पर
जीवन
बनाने
ही
निकलते
हैं
घरों
से
- Manoj Devdutt
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उसे
अभी
भी
मेरे
दिल
के
हाल
का
नहीं
पता
तो
यानी
उसको
अपने
घर
का
रास्ता
नहीं
पता
ये
तेरी
भूल
है
ऐ
मेरे
ख़ुश-ख़याल
के
मुझे
पराई
औरतों
से
तेरा
राब्ता
नहीं
पता
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Ruqayyah Maalik
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आप
क्या
आए
कि
रुख़्सत
सब
अंधेरे
हो
गए
इस
क़दर
घर
में
कभी
भी
रौशनी
देखी
न
थी
Hakeem Nasir
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उन
के
होने
से
बख़्त
होते
हैं
बाप
घर
के
दरख़्त
होते
हैं
Unknown
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नताएज
जब
सर-ए-महशर
मिलेंगे
मोहब्बत
के
अलग
नंबर
मिलेंगे
तुम्हारी
मेज़बानी
के
बहाने
कोई
दिन
हम
भी
अपने
घर
मिलेंगे
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Khurram Afaq
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मैं
ये
भी
चाहती
हूँ
तिरा
घर
बसा
रहे
और
ये
भी
चाहती
हूँ
कि
तू
अपने
घर
न
जाए
Rehana Roohi
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हर
इक
सू
हैं
दर-ओ-दीवार
लेकिन
मुयस्सर
है
नहीं
घर-बार
लेकिन
Umrez Ali Haider
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लोग
कहते
हैं
कि
इस
खेल
में
सर
जाते
हैं
इश्क़
में
इतना
ख़सारा
है
तो
घर
जाते
हैं
Shakeel Jamali
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सफ़र
के
बाद
भी
ज़ौक़-ए-सफ़र
न
रह
जाए
ख़याल
ओ
ख़्वाब
में
अब
के
भी
घर
न
रह
जाए
Abhishek shukla
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कहाँ
रोते
उसे
शादी
के
घर
में
सो
इक
सूनी
सड़क
पर
आ
गए
हम
Shariq Kaifi
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हसीन
यादों
के
चाँद
को
अलविदा'अ
कह
कर
मैं
अपने
घर
के
अँधेरे
कमरों
में
लौट
आया
Hasan Abbasi
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यूँँ
ग़ज़ल
को
अब
बहर
है
ज़रूरी
गाँव
को
जैसे
शहर
है
ज़रूरी
खेत
बंजर
ही
हो
गए
सभी
के
खेत
को
अब
तो
नहर
है
ज़रूरी
दाम
कब
मिलते
हैं
किसान
को
अब
बचने
को
अब
फिर
ज़हर
है
ज़रूरी
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Manoj Devdutt
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यहाँ
नहीं
तो
हम
मिलेंगे
आसमान
में
सभी
तरह
के
गुल
खिलेंगे
आसमान
में
चिराग़
जो
बुझा
दिए
गए
ज़मीन
पर
चिराग़
वो
जले
मिलेंगे
आसमान
में
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Manoj Devdutt
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आग़ोश
में
तू
ले
मुझे
सब
दर्द
अपने
दे
मुझे
जब
तू
रहेगी
पास
तो
कुछ
लोग
समझेंगे
मुझे
जब
भी
मुसीबत
उसपे
हो
तो
आगे
बस
रक्खे
मुझे
चाहत
मेरी
भी
ये
रही
तू
भी
कभी
ढूँडे
मुझे
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Manoj Devdutt
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जो
पार
हद
को
कर
गए
हैं
अब
ज़िन्दा
नहीं
हैं
मर
गए
हैं
अब
सब
रात
को
घर
ही
गए
थे
पर
तारे
सवेरे
घर
गए
हैं
अब
अब
आग
जिसने
भी
लगाई
थी
जल
उनके
भी
तो
घर
गए
हैं
अब
दौलत
नहीं
तो
क्या
हुआ
शायर
पन्ने
बहुत-से
भर
गए
हैं
अब
सच
बोलने
निकला
कोई
भी
जब
नेता
सभी
फिर
डर
गए
हैं
अब
अब
प्यार
करना
था
नहीं
हमको
पर
प्यार
तो
हम
कर
गए
हैं
अब
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Manoj Devdutt
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इक
ग़लती
अब
दो
बार
मैं
करता
नहीं
बस
इसलिए
भी
प्यार
मैं
करता
नहीं
हैं
लोग
करते
पीठ
पर
ही
बार
अब
पर
पीठ
पर
ही
वार
मैं
करता
नहीं
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Manoj Devdutt
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