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Manoj Devdutt
ik ghalti ab do baar main karta nahin
ik ghalti ab do baar main karta nahin | इक ग़लती अब दो बार मैं करता नहीं
- Manoj Devdutt
इक
ग़लती
अब
दो
बार
मैं
करता
नहीं
बस
इसलिए
भी
प्यार
मैं
करता
नहीं
हैं
लोग
करते
पीठ
पर
ही
बार
अब
पर
पीठ
पर
ही
वार
मैं
करता
नहीं
- Manoj Devdutt
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तदबीर
के
दस्त-ए-रंगीं
से
तक़दीर
दरख़्शाँ
होती
है
क़ुदरत
भी
मदद
फ़रमाती
है
जब
कोशिश-ए-इंसाँ
होती
है
Hafeez Banarasi
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क्या
लोग
हैं
कि
दिल
की
गिरह
खोलते
नहीं
आँखों
से
देखते
हैं
मगर
बोलते
नहीं
Akhtar Hoshiyarpuri
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मत
सहल
हमें
जानो
फिरता
है
फ़लक
बरसों
तब
ख़ाक
के
पर्दे
से
इंसान
निकलते
हैं
Meer Taqi Meer
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समझ
से
काम
जो
लेता
हर
एक
बशर
'ताबाँ'
न
हाहा-कार
ही
मचते
न
घर
जला
करते
Anwar Taban
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मिरे
किरदार
जाने
दे
नज़रअंदाज
कर
दे
ख़ुदा
की
फ़िल्म
है
ये
आदमी
से
क्या
शिकायत
Vikram Sharma
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अपनी
हस्ती
का
भी
इंसान
को
इरफ़ांन
हुआ
ख़ाक
फिर
ख़ाक
थी
औक़ात
से
आगे
न
बढ़ी
Shakeel Badayuni
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हम
लोग
चूंकि
दश्त
के
पाले
हुए
हैं
सो
ख़्वाबों
में
चाहे
झील
हों,
आँखों
में
पेड़
हैं
Siddharth Saaz
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हर
आदमी
में
होते
हैं
दस
बीस
आदमी
जिस
को
भी
देखना
हो
कई
बार
देखना
Nida Fazli
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जो
लोग
ख़ुद
न
करते
थे
होंठों
से
पान
साफ़
पलकों
से
कर
रहे
हैं
तेरा
पायदान
साफ़
Charagh Sharma
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सारे
ग़म
भूल
गए
आपके
रोने
पे
मुझे
किसको
ठंडक
में
पसीने
का
ख़्याल
आता
है
आखरी
उम्र
में
जाते
है
मदीने
हम
लोग
मरने
लगते
है
तो
जीने
का
ख़याल
आता
है
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Nadir Ariz
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ख़ुद
से
तुझे
हटा
रहा
हूँ
मैं
ख़ुद
को
बहुत
सता
रहा
हूँ
मैं
उसने
जगाया
रातों
को
मुझको
रातों
को
अब
जगा
रहा
हूँ
मैं
हक़
तू
नहीं
समझ
रही
तो
क्या
हक़
तुझपे
तो
जता
रहा
हूँ
मैं
इज़्ज़त
तेरी
बचानी
है
मुझको
हरक़त
तेरी
दबा
रहा
हूँ
मैं
मालूम
है
ग़लत
थी
तू
फिर
भी
सबको
ग़लत
बता
रहा
हूँ
मैं
बस
में
तुझे
बिठा
दिया
ज़िन्दा
लाश
ख़ुद
को
बना
रहा
हूँ
मैं
घर
पर
बहन
जवान
बैठी
है
बस
इसलिए
कमा
रहा
हूँ
मैं
ग़म
से
हुई
है
'देव'
की
यारी
हर
ग़म
पे
मुस्कुरा
रहा
हूँ
मैं
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Manoj Devdutt
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आधा
अधूरा
छोड़ा
जो
फ़रहाद
ने
वो
कोहकन
माँझी
ने
ही
पूरा
किया
Manoj Devdutt
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बीनाई
मेरी
साथ
अपने
ले
गया
वैसे
उसके
अलावा
था
नहीं
कुछ
देखने
को
भी
Manoj Devdutt
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अफ़सोस
उस
पर
क्या
करूँँगा
मैं
जो
हाथ
में
है
ही
नहीं
मेरे
Manoj Devdutt
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शीशे
में
भी
तू
दिखती
है
मुझको
मुझ
में
अब
मैं
बिल्कुल
बचा
नहीं
हूँ
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Manoj Devdutt
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